शहर की ऐतिहासिक रामलीला में सोमवार को राम वन गमन की लीला का मार्मिक मंचन किया गया। नदी को नाव से पार कराने के लिए केवट का राम के पैर धोने का आग्रह और इसके लिए हुए राम केवट संवाद सुनकर दर्शक भाव विभोर हो उठे। केवट के आग्रह में छिपी भक्ति की भावना को भगवान राम ने अच्छी तरह समझा। केवट ने न केवल राम के चरण पखार कर अपने जीवन को धन्य किया बल्कि चतुराई से उनसे पुन: आने का वचन भी ले लिया।
स्थानीय सेठ घाट पर हुई इस लीला को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ जुटी। लक्ष्मण और सीता के साथ वन को जाते हुए राम ने जब केवट से नदी पार कराने का आग्रह किया तो उसने बिना चरण धोए अपनी नाव पर बिठाने से मना कर दिया। कहा, जब एक पत्थर को स्पर्श करने से वह एक नारी में बदल गई, नाव तो लकड़ी की बनी हुई है। इसके नारी बनने में कितनी देरी लगेगी। कहा- छ़ुवत शिला भइ नारि सुहाई, पाहन ते न काठ कठिनाई। भगवान राम केवट के आग्रह में छिपी भावना को तुरंत भांप जाते हैं। और केवट को अपने पांव पखारने की अनुमति दे देते हैं।
नदी पार करने के बाद जब भगवान राम केवट को उतराई में अपनी मुद्रिका देने लगते हैं तो केवट उतराई लेने से मना कर देता है कहता है कि भव सागर के पार उतारने वाले प्रभु को आज नदी पार कराने का सौभाग्य मिला है इससे बड़ा पुरस्कार और क्या हो सकता है। राम के जिद करने पर वह लौटते समय उतराई लेने को कहता है। राम एक बार फिर उसकी भक्ति के कायल हो जाते हैं। वह समझ जाते हैं कि राम दोबारा दर्शन करने की इच्छा के तहत वापसी पर उतराई लेने की बात कह रहा है।
भगवान राम और केवट का संवाद देख मौजूद दर्शक भाव विभोर हो उठे। पात्रों ने बड़े ही प्रभावशाली ढंग से मंचन किया। इस लीला ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। शहर की इस ऐतिहासिक रामलीला को देखने के लिए काफी संख्या में दर्शक उमड़ रहे हैं।