पहाड़ों पर हुई बारिश से यहां शारदा नदी एक बार फिर उफान पर आ गई है। वह वृहस्पतिवार की शाम तीन बजे खतरे के निशान से 38 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। शारदा के एक बार फिर से बढ़े जलस्तर को देखकर नदी के समीपवर्ती गांवों के ग्रामीणों के दिल दहल उठे। हालांकि शाम को बनबसा से रिलीजिंग कम हो गई, इससे उन्होंने राहत की सांस ली।
पहाड़ों पर बुधवार को खासी बारिश हुई, जिसके चलते बनबसा बैराज से अतिरिक्त पानी की रिलीजिंग बढ़ गई और यहां शारदा नदी खतरे के निशान 153.620 को पार कर 154.000 पर बहने लगी। यह खतरे के निशान से करीब 38 सेंटीमीटर ऊपर है। शारदा नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ता देख नदी के समीपवर्ती गांवों के ग्रामीणों के दिल दहल उठे, लेकिन शाम को ही उन्हें राहत मिल गई। सुबह बनबसा से रिलीजिंग 69 हजार 595 क्यूसेक थी, जो शाम तीन बजे घटकर करीब 48 हजार क्यूसेक रह गई। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और मंडरा रहा बाढ़ का खतरा टलता नजर आने लगा है। बता दें कि पूर्व में आई बाढ़ का पानी अभी भी निचले और नदी के समीपवर्ती गांवों के खेतीहर इलाके में भरा हुआ है, ऐसे में और पानी आ जाता तो मुश्किलें और भी बढ़ जातीं। गनीमत रही कि रिलीजिंग कम हो गई।
डीएम ने देखा उमेशनगर में कटान
तिकुनियां। कस्बे से तीन किलोमीटर की दूरी पर बह रही मोहाना नदी में जबरदस्त कटान शुरू हो गया, जिसे डीएम किंजल सिंह ने दोपहर दो बजे कड़ी धूप में गांव उमेशनगर पहुंचकर कटान पीड़ितों की समस्याएं सुनीं। मोहाना नदी किनारे बसी ग्राम पंचायत सूरतनगर का मजरा गांव उमेश नगर में और इंदरनगर में भयंकर कटान नदी कर रही है। कटान से घबराकर गांव निवासी सुरेश कुमार अपना पक्का मकान तोड़ रहे हैं। डीएम ने यहां एसडीएम पीके सिंह से कहा कि इन्हें शीघ्र मंडी समिति में बसाया जाय। ग्रामीणों ने कहा कि कटान रोकने का बंदोबस्त किया जाय, जिस पर डीएम ने नदी की तेज धारा होने के कारण इससे इनकार किया। डीएम बोलीं, इस समय केवल कटान पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर बसाया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने मंडी समिति पहुंचकर वहीं रह रहे पूर्व कटान पीड़ितों के करीब साढ़े तीन सौ परिवारों का हालचाल लिया। यह कटान पीड़ित दो वर्ष पहले मोहाना नदी में सूरतनगर गांव कटने पर यहीं आकर बसे हैं। इस दौरान जिला सूचना अधिकारी, एसडीएम पीके सिंह सहित ग्राम निवासी सुरेश दूधनाथ गणेश सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
दस वर्ष में तीन पंचायतों के कटे बार्डर के सात गांव
तिकुनियां। बार्डर पर मोहाना नदी ने बीते दस साल में सात गांव बंदरहिया, रामनगर संकल्पा, नयी बस्ती, सूरतनगर, अनूपनगर, कश्यपनगर, नया पिंड मोहाना नदी में कटकर समा चुके हैं। ग्राम पंचायत सूरतनगर के पूर्व प्रधान अमूल्य त्रिपाठी ने कहा कि ठोकर निर्माण के लिए दस साल से सैकड़ों प्रार्थना पत्र देकर मौजूदा सरकारों के मुखिया को आगाह किया गया, लेकिन नतीजा शून्य रहा। ग्राम पंचायत खैरटिया के प्रधान त्रिलोक सिंह ने कहा कि तीन साल पहले पूरा गांव में नदी में कटकर समा गया। जसनगर के प्रधान पति सुरेश तड़वाड़ ने कहा कि मोहाना नदी में उनकी पंचायत के दो गांव समा चुके हैं। बनवीरपुर ग्राम पंचायत के प्रधान राजकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि उनकी पंचायत के दो गांव रामनगर व मुंजहा नदी से करीब पांच सौ मीटर की दूरी पर हैं इन गांवों पर भी कटान का खतरा मंडरा रहा है।