बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) के जंगलों से गुजरने वाली रेल लाइन और तेज रफ्तार वाहन वन्यजीवों के लिए लगातार जानलेवा साबित हो रहे हैं। तय गति सीमा के बावजूद हादसे थम नहीं रहे हैं और दुर्लभ वन्यजीव आए दिन अपनी जान गंवा रहे हैं।
मंगलवार रात मैलानी रेंज की महुरेना बीट में रेल लाइन पार कर रही एक बाघिन ट्रेन की चपेट में आ गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह रेल खंड जंगल के बीच से गुजरता है, जहां दिन-रात ट्रेनों की आवाजाही रहती है।
जंगल में विचरण करने वाले बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीव अक्सर जटपुरा बीट से महुरेना जंगल के बीच आवागमन के दौरान रेल ट्रैक पार करते हैं। इसी दौरान वे तेज रफ्तार ट्रेनों की चपेट में आ जाते हैं।
तीन साल में पांच वन्यजीवों की हुई मौत
13 जनवरी, 2023 : बांकेगंज-मैलानी रेल खंड पर ट्रेन की चपेट में तीन मादा चीतल की मौत
27 जून, 2023 : इसी रेल खंड पर ट्रेन से टकराकर मादा भालू की मौत
10 मई, 2024 : ट्रेन की चपेट में आकर बाघ का शावक गंभीर रूप से घायल
26 फरवरी, 2025 : किशनपुर अभयारण्य से गुजरने वाले हाईवे पर वाहन की टक्कर से बाघ की मौत
1 अप्रैल, 2026 : बांकेगंज-मैलानी रेल खंड पर ट्रेन की टक्कर से बाघिन की मौत
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जंगल में 30 किमी/घंटा तय है गति
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की डीएफओ कीर्ति चौधरी ने बताया कि बांकेगंज-मैलानी रेल खंड पर करीब 12 किलोमीटर का हिस्सा जंगल से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में लोको पायलटों को 30 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से सतर्कता के साथ ट्रेन चलाने के निर्देश हैं। हालांकि, हादसे के समय ट्रेन की वास्तविक गति क्या थी, इसका पता जांच के बाद ही चल सकेगा।
दुधवा जंगल में रेल लाइन पार करते हाथी। फाइल फोटो।