जिले में करीब 127 साल पहले ट्रेनें शुरू हुई लेकिन यहां रेल सुविधाओं में इजाफा होने के बजाय इसमें कमी आती गई। आज से 40 साल पहले तक लखीमपुर होते हुए लखनऊ से जोधपुर, कासगंज से कानपुर तक सीधी रेल सेवाएं थी। हाल के कुछ साल पहले तक काठगोदाम (नैनीताल) तक ट्रेन जाती थी। घटते-घटते यह रेल सेवाएं अब केवल ऐशबाग से इज्जतनगर (बरेली) तक सीमित रह गई हैं।
भले ही कानपुर-कासगंज, नैनीताल और आगरा, मथुरा और जोधपुर के बीच मीटरगेज की जगह ब्राडगेज हो जाने के कारण इन रेल सेवाओं में कटौती की गई हो लेकिन खीरी जिले को इससे बड़ा नुकसान हुआ है। खीरी जिले का संपर्क देश के बड़े शहरों से कट गया है। अब ऐशबाग-पीलीभीत के बीच ब्राडगेज आमान परिवर्तन का काम शुरू होने से यहां के लोगों को उम्मीदों के पंख लग गए हैं। लोगों में उम्मीद जगी है कि भारत-नेपाल सीमा पर स्थित यह जिला देश के अन्य हिस्सों से रेलवे लाइन के जरिए जुड़ सकेगा।
रेल सेवाओं के विस्तार में मौजूदा सांसद के प्रयास
मौजूदा सांसद अजय मिश्र टेनी ने जनवरी में रेल मंत्री को पत्र लिखकर खीरी जिले में रेलवे के विकास के लिए पांच सूत्री मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि
-ऐशबाग से लखीमपुर-मैलानी होते हुए पीलीभीत तक आमान परिवर्तन के लिए बजट इसी सत्र में उपलब्ध कराया जाए ताकि काम में तेजी आ सके
-लखीमपुर जिले के 47 स्वीकृत मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर बैरियर के लिए आवश्यक धन इसी बजट सत्र में उपलब्ध कराया जाए
-दुधवा नेशनल पार्क में पर्यटन विकास के लिए लखनऊ और बरेली से मैलानी होते हुए तिकुनियां तक दो नई ट्रेनें टाइगर एक्सप्रेस और स्वाम्प डियर एक्सप्रेस के नाम से चलाई जाएं ताकि पर्यटक आसानी से दुधवा पहुंच सकें
-सीतापुर से नई दिल्ली के लिए एक नई शताब्दी ट्रेन चलाई जाए, इससे जिले के लोगों को लाभ मिले
-सेंक्चुरी ट्रेन जो लखनऊ से पलिया तक चलती है को बढ़ाकर तिकुनिया तक किया जाए।
सांसद के यह प्रयास क्या रंग लाते हैं यह तो रेलवे बजट आने के बाद ही पता चलेगा लेकिन आने वाले रेल बजट से खीरी जिले के लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं।
पूर्व सांसद ने कहा हमने शुरू कराया आमान परिवर्तन
पूर्व सांसद जफर अली नकवी का दावा है कि उनके प्रयासों से ही ऐशबाग-पीलीभीत के बीच 262.16 किलोमीटर ब्राडगेज स्वीकृत हुआ है। यह मांग पिछले 50 वर्षों से चली आ रही थी। इस पर वर्ष 2013 में शिलान्यास होने के साथ ही काम शुरू हो गया था। केंद्र में सरकार बदलने के बाद आमान परिवर्तन के काम की गति धीमी हुई है लेकिन यह बड़ी उपलब्धि है।