त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने अनन्तिम मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया। सूची के मुताबिक जिले की 1167 ग्राम पंचायतों में दो लाख, 25 हजार 756 मतदाता बढ़ गए हैं। इससे जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 22 लाख, 55 हजार 509 से बढ़कर 24 लाख, 81 हजार 265 हो गई है। सबसे ज्यादा मतदाता फूलबेंहड़ में बढ़े हैं। दूसरे नंबर पर पलिया, तीसरे नंबर पर निघासन ब्लाक में मतदाता बने हैं। अनन्तिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर जिले में हलचल बढ़ गई है। शुक्रवार से पंचायत स्तर पर निर्धारित बूथों पर 20 अगस्त तक दावे/आपत्तियां लेने के लिए सभी बीएलओ की तैनाती कर दी गई है। इसके अलावा तहसील स्तर और विकास खंड पर भी दावे/आपत्तियां ली जा रही हैं।
सूची के मुताबिक फूलबेंहड़ ब्लाक में सबसे ज्यादा 20520 मतदाता बने हैं। दूसरे नंबर पर पलिया ब्लाक में 19067 मतदाता बनाए गए हैं। तीसरे नंबर पर निघासन में 18791 मतदाता और फिर ईसानगर में 18134 लोग मतदाता बने हैं। इसी क्रम में लखीमपुर में 18537, बिजुआ में 17910, रमियाबेंहड़ में 17779, मोहम्मदी में 16050, धौरहरा में 15797, नकहा में 14154, गोला में 14091, पसगवां में 13799, मितौली में 12329, मोहम्मदी में 10406 मतदाता बनाए गए हैं।
एडीएम एसपी सिंह ने बताया कि अनन्तिम मतदाता सूची का प्रकाशन हो गया है।
जिसमें सवा दो लाख मतदाता बढ़े हैं। आम जनमानस के लिए बीएलओ द्वारा
निर्धारित बूथों पर सूचियां भिजवाई गई हैं। ताकि लोग 20 अगस्त तक
दावे/आपत्तियां दाखिल कर सकें।
बेहजम ब्लाक में घट गए मतदाता
अनन्तिम मतदाता सूची के हिसाब से बेहजम ब्लाक में 1608 मतदाता घट गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक नामों में संशोधन, मृत व्यक्तियों, ग्राम पंचायत में रहने वाले मतदाताओं और कम उम्र वाले मतदाताओं का नाम कटने से औसतन मतदाताओं की संख्या में कमी आई है।
सूची से बाहर किए गए 313865 लोग
अनन्तिम सूची के प्रकाशन के बाद जिले भर की ग्राम पंचायतों में मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम में लगाए गए बीएलओ की कार्यशैली की भी पोल खुली है। बीएलओ ने 539621 मतदाताओं को पुनरीक्षण सूची में शामिल कर दिया था, जिसके बाद हुई जांच में 95672 मतदाताओं का नाम संशोेधित किया गया। जबकि 313865 मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए। जांच में पाया गया कि मृत व्यक्तियों, कम उम्र वाले मतदाताओं, गांव छोड़ने वाले व्यक्तियों का नाम काटा नहीं गया है। कई जगहों पर दूसरे गांवों के लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल कर देने का मामला भी प्रकाश में आया था।