दशहरा मेला में पंजाबी संगीत सम्मेलन के दौरान कार्यक्रम पेश करते कलाकार। संवाद
लखीमपुर खीरी। ऐतिहासिक दशहरा मेले के पांचवें दिन पंजाबी सुरों और भांगड़े की थाप ने रामलीला मेले में मस्ती के रंग घोल दिए। नगर पालिका परिषद की ओर से आयोजित पंजाबी संगीत सम्मेलन में पंजाबी गीत-संगीत और मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। सांस्कृतिक संध्या के दौरान चार विभूतियों को विशिष्ट सम्मान से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. एससी मिश्रा, लल्लू राम शुक्ला, रमेश सविता और केके दीक्षित को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के माध्यम से समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कुलदीप गिल और रमनदीप गिल की प्रस्तुतियां रहीं। पंजाबी गीतों की मधुर धुनों और ऊर्जावान भांगड़े ने मेला परिसर में उत्साह भर दिया। कलाकारों की आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों पर दर्शक तालियां बजाते और झूमते नजर आए।
कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी एवं साहित्यकार राममोहन गुप्त ने किया। इस मौके पर संयोजक मंडल के सदस्य विक्रम गुप्ता, कौशल तिवारी, अजय गुप्ता लकी, पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव, ईओ संजय कुमार, मेला अध्यक्ष रवींद्र रावत, मेला अधिकारी समरा सईद सहित अनेक नागरिक उपस्थित रहे।
-रावण के जन्म की लीला का मंचन
ममरी। अजान गांव में चल रहे दस दिवसीय रामलीला मेले के तीसरे दिन कलाकारों ने रावण के जन्म की लीला का मंचन किया। कलाकारों ने दिखाया कि रावण के जन्म के साथ ही पृथ्वी पर उथल-पुथल मच गई। रावण ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या कर अमरता का वरदान मांगा। ब्रह्मा जी ने अमरता का वरदान देने से इनकार करते हुए उसे यह वरदान दिया कि उसकी मृत्यु वानर या मनुष्य के हाथों होगी, जबकि अन्य कोई उसे नहीं मार पाएगा। यह वरदान पाकर रावण अहंकारी हो गया और अत्याचार करने लगा। संवाद