प्रशासन ने बाढ़-पीड़ितों को न दिया मुआवजा न ही दी छत
खेती योग्य जमीनें और घरों को बाढ़-कटान में खो चुके पीड़ितों की माली हालत खस्ता हो चुकी है। कटान में खेत के साथ ही फसलें नष्ट होने से तमाम किसान खानाबदोश हो चुके हैं। राहत के नाम पर शासन-प्रशासन ने लइया-चना, आलू-पूड़ी बंटवाकर खानापूर्ति कर ली है। राहत शिविरों को बंद किए जा चुके हैं। कटान पीड़ितों की समस्याओं का निराकरण तो दूर अफसर सुनने को भी तैयार नहीं है, जिससे पीड़ितों में रोष पनप रहा है।
ईसानगर क्षेत्र के गांव निहालपुरवा निवासी राममिलन आंख से कमजोर होने के कारण मजदूरी भी नहीं कर सकते, उनकी कमाई का जरिया आठ बीघा जमीन कटान में कट चुकी है। वह बताते हैैं कि अब घाघरा नदी ने गांव की ओर रुख कर दिया है, जिससे उनका घर भी किसी दिन कट सकता है। राहत के नाम पर लइया-चना ही मिला है। मुआवजा अब तक नहीं दिया गया और न ही अफसर कुछ आश्वासन दे रहे हैं। नारीबेहड़ गांव निवासी सिपाही लाल ने बताया कि पांच एकड़ जमीन घाघरा नदी में समा चुकी है। अब तेजी से हो रहे कटान की जद में उनका घर भी आने वाला है। तहसील प्रशासन ने अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया है। ग्राम पंचायत फिरोजाबाद के मजरा सरैंया निवासी किशोरी लाल ने बताया कि 2011 में पांच एकड़ जमीन कट गई थी, अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया। जबकि चार बार घर कट चुका है, जो पांचवी बार भी कट सकता है। एक पैर से विकलांग अटवा गांव निवासी बउवा भी अन्य ग्रामीणों की तरह पीड़ित हैं, उनकी 15 बीघा जमीन कटकर नदी में समा चुकी है। कमाई का जरिया खेत नदी में समा जाने से परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो चुका है, लेकिन अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया है।
बाढ़-कटान में कुल प्रभावित क्षेत्रफल
बाढ़ राहत एवं आपदा विभाग के मुताबिक इस वर्ष बाढ़-कटान की चपेट में आकर 19344 हेक्टेयर जमीन प्रभावित हुई है, जिसमें 13077 हेक्टेयर कृषि योग्य जमीन है। इसमें से 1475 हेक्टेयर (22125 बीघा) जमीन नदी में समा चुकी है। जबकि 83.25 लाख कीमत की फसलों के नुकसान का अनुमान है। इसके अलावा 98 पक्के मकान और 62 कच्चे घर नष्ट हो चुके हैं।
राहत के नाम पर प्रशासन की ओर से मदद
राहत एवं बचाव कार्य के नाम पर अब तक 1686 लंगर चलाने का दावा विभाग कर रहा है, जिसमें 219 चालू हालत में हैं। बाढ़ प्रभावितों को 124 पैकेट मोमबत्ती, 5745 मीटर त्रिपाल, 8472 लंच पैकेट, छह हजार पैकेट ब्रेड/बिस्कुट, 27088 क्लोरिन टेबलेट, 2473 पैकेट ओआरएस, 204 जरीकेन, 124-124 नहाने और कपड़ा धोने का साबुन वितरित किया गया है। अनुग्रह सहायता के मद में धनराशि वितरण शून्य है।