लखीमपुर में राजापुर आवासीय योजना के विरोध में प्रदर्शन करते ग्रामीण
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लखीमपुर खीरी। आवास विकास परिषद ने अधिगृहित की गई राजापुर एलआरपी आवासीय योजना के मामले में किसानों और जमीन मालिकों को प्रतिकर भुगतान देने के लिए दो दिवसीय कैंप लगाया, जिसमें पहले दिन किसानों ने पुराने रेट के हिसाब से जमीन का प्रतिकर भुगतान लेने से इंकार कर दिया । सोमवार को किसान, सभी जमीन मालिक आवास विकास परिषद के कार्यालय पहुंचे, जहां पर किसानों ने एडीएम (भूमि अधिग्रहण) को बुलाने की मांग की। इसके बाद लोगों ने हंगामा करते हुए कैंप का बहिष्कार कर दिया। बाद में किसान और कई जमीन मालिक डीएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। किसानों ने आरोप लगाया है कि आवास विकास परिषद के सक्षम अधिकारी नहीं आए, बल्कि अमीन और बाबू को भेज दिया।
राजापुर एलआरपी आवासीय योजना के लिए परिषद ने वर्ष 2010 में 165 किसानों की 317 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। कोरोनाकाल में लॉकडाउन के चलते कई माह कार्रवाई बाधित रही, जिसके बाद एडीएम (भूमि अधिग्रहण) लखनऊ रामअरज ने किसानों के आवेदन फार्म भरवाने के लिए 28 और 29 दिसंबर 2020 को आवास विकास कॉलोनी स्थित संपत्ति कार्यालय में कैंप लगवाया है। एडीएम ने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए कैंप लगवाया था, जिसमें आवेदन जमा करने के लिए अमीन राकेश कुमार और कनिष्ठ लिपिक अवधेश कुमार को भेजा गया। पहले दिन ही कुछ लोगों ने हंगामा करते हुए प्रतिकर लेने के लिए आवेदन जमा नहीं किया और न ही आवश्यक प्रपत्र दिए। काफी देर तक हंगामा चलता रहा। किसानों और जमीन मालिकों ने पुराने रेट पर प्रतिकर दिए जाने का विरोध करते हुए अधिकारियों को बुलाने की मांग उठाई। विजय कुमार, संतराम, तरुण कुमार, विनोद कुमार आदि ने बताया कि किसानों की हाईवे किनारे जमीन के रेट का प्रतिकर कौड़ियों में दिया जा रहा है, जिससे किसान बर्बाद हो जाएंगे।
कई सालों से लटका प्रतिकर भुगतान का मामला
2016-17 में अफसरों ने सर्किल रेट 88 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर का दोगुना मुआवजा देने की बात कहकर किसानों को प्रतिकर भुगतान करने की कार्रवाई प्रारंभ की थी, लेकिन किसानों ने सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा देने की मांग उठाई थी। अगस्त 2019 में जमीन का सीमांकन करने आए आवास विकास परिषद के अधिकारियों को रास्ते में ही घेर लिया था। इसके बाद फरवरी 2020 में प्रतिकर भुगतान के लिए आवेदन पत्र भरवाने आए कर्मचारियों को किसानों के आक्रोश के चलते बेरंग होना पड़ा था।
कुछ किसानों ने प्रतिकर भुगतान प्राप्त कर लिया है। किसानों को लखनऊ न दौड़ना पड़े, जिसके लिए कैंप लगवाया था। कुछ लोगों ने कार्रवाई के दौरान हंगामा करके विरोध जताया है, लेकिन इससे किसानों को ही नुकसान हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित गाइड लाइन के मुताबिक ही प्रतिकर भुगतान दिया जा रहा है। धारा चार (जमीन का अधिग्रहण) के प्रकाशन और धारा 28 की विज्ञप्ति जारी होने के दौरान 17.91 रुपये प्रति फुट प्रतिकर भुगतान निर्धारित था। - रामअरज, अपर जिलाधिकारी (भूमि अधिग्रहण), लखनऊ