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कोरोना ने बेपटरी की पढ़ाई तो ऑनलाइन माध्यम ने खोले नए रास्ते

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लखीमपुर खीरी। साल-2020 माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के लिए बेहद उतार-चढ़ाव वाला रहा। पूरे साल उपलब्धियां कम और समस्याएं ज्यादा हावी रहीं। बावजूद इसके कोरोना के कारण शिक्षा व्यवस्था अगर बेपटरी हुई तो ऑनलाइन पढ़ाई ने नए रास्ते खोल दिए।
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माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा व्यवस्था को कोरोना ने बुरी तरह प्रभावित किया। कोरोना के कारण मार्च से बंद हुए विद्यालय और कॉलेज साल के अंत में खुल सके। विद्यालय और कॉलेज बंद होने पर ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प निकाला गया, लेकिन तमाम छात्र मोबाइल के अभाव में ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित रहे तो वहीं जिनके पास मोबाइल था, वह कमजोर नेटवर्क की समस्या से जूझते रहे।
इस दौरान माध्यमिक स्कूलों को करीब 88 नए शिक्षक मिलना राहत भरा रहा।
यह कोरोना का ही प्रभाव था कि बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं का समय से मूल्यांकन नहीं हो सका तो 2021 में होने वाली बोर्ड परीक्षा के लिए दिसंबर में केंद्र निर्धारित नहीं किए जा सके।
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कोरोना के कारण वित्तविहीन शिक्षक, अभिभावक परेशान रहे। लॉकडाउन के कारण आमदनी प्रभावित होने से जहां अभिभावकों के सामने बच्चों की फीस जमा करने में दिक्कत आई तो वित्तविहीन स्कूल प्रबंधन के सामने शिक्षकों के वेतन को लेकर परेशानी रही ।
वरदान साबित हुई ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था
कोरोना के कारण लॉकडाउन की समय सीमा बढ़ती रही। ऐसे में शासन ने ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प देकर समस्या समाधान करने की कोशिश की। नई व्यवस्था मेें कुछ विद्यालयों ने व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर पढ़ाई व्यवस्था शुरू की तो कुछ शिक्षक वर्चुअल क्लास लगाकर पढ़ाते रहे। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई वरदान साबित हुई।
प्रयोगात्मक परीक्षाएं रहीं प्रभावित तो स्कूल-कॉलेज बच्चों को भेजने को लेकर अभिभावक रहे असमंजस में
हाईस्कूल-इंटर के अलावा स्नातक के कई विषयों में प्रयोगात्मक परीक्षाएं होती है। इसमें मिले अंक मेरिट बनाने में सहायक साबित होते हैं। मगर, इस बार कोरोना के कारण प्रयोगात्मक परीक्षाएं नहीं हो सकीं। अक्तूबर में कक्षा नौ से लेकर 12 और बाद में स्नातक एवं परास्नातक कक्षाएं शुरू तो हुईं, लेकिन प्रयोगात्मक परीक्षाओं पर संकट छाया रहा। शासन के निर्देशानुसार सामाजिक दूरी का पालन करते हुए छात्रों को एक दिन छोड़कर बुलाया जाता रहा। मगर, कोरोना के कारण तमाम अभिभावक अपने बच्चों को कॉलेज भेजने से बचते रहे।
फीस जमा करने को लेकर मची रही उठा पटक
निजी स्कूल प्रबंधन की ओर से अभिभावकों पर फीस जमा करने का दबाव बनाने का खूब विरोध हुआ। यहां तक कि दो बार डीएम की अध्यक्षता में अभिभावकों एवं निजी स्कूल संघ की बैठक हुई जो बेनतीजा रही। धीरे धीरे मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अभिभावक आज भी फीस माफी की आस लगाए बैठे हैं।
61 डिग्री कॉलेज लखनऊ विश्वविद्यालय से जुड़े
पलिया स्थित एक राजकीय डिग्री कॉलेज सहित 61 महाविद्यालय कानपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध थे शासन ने लखनऊ विश्वविद्यालय का सीमा विस्तार करते हुए लखीमपुर के डिग्री कॉलेजों को भी इससे संबद्ध कर दिया।
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