एक तरफ भीषण गर्मी, दूसरी ओर बिजली की कटौती ने लोगों का बुरा हाल कर दिया है। जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की किल्लत से रोस्टर की धज्जियां उड़ गई हैं, इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। खासकर सावन के महीने में अनियमित कटौती के कारण शहर के लोगों को बिजली-पानी की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शहर में रविवार की रात 11.15 बजे से तीन बजे तक सिस्टम कंट्रोल से इमरजेंसी रोस्टरिंग लागू कर दी गई। जिससे लोग भीषण गर्मी से बिलबिला उठे। इसके बाद दो घंटे के लिए बिजली आई, लेकिन सुबह पांच बजे से 11 बजे तक के लिए फिर से रोस्टरिंग कर बिजली काट दी गई। इससे सावन के दूसरे सोमवार को भी लोग को पानी के लिए तरस गए। बिजली न मिलने के कारण लोगों को शिव का जलाभिषेक करने के लिए भी ताजा पानी नहीं मिल पाया। जिसके कारण लोगों में काफी आक्रोश है। बता दें कि बिजली विभाग के अधिकारी शहर में 15 घंटा बिजली सप्लाई करने का दावा करते हैं, लेकिन मौजूदा समय में टुकड़ों में मिल रही सप्लाई की वजह से ही लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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क्या है बिजली का रोस्टर
शहर में लागू रोस्टर के मुताबिक दिन में 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक बिजली सप्लाई की जाती है। वहीं शाम छह बजे से लेकर सुबह पांच बजे तक बिजली देने का निर्देश है, लेकिन बीते कुछ दिनों से रात में कई-कई घंटे बिजली काट दी जा रही है। इससे लोगों की दिक्कतें बढ़ी हुई हैं।
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बिजली कटते ही मोबाइल स्विच ऑफ किया
शहर में रविवार रात 11.15 बजे जैसे ही बिजली कटी, लोगों ने कटौती का कारण जानने के लिए उपकेंद्रों पर फोन करना शुरू किया, लेकिन गढ़ी, नई बस्ती और छाउछ उपकेंद्रों के सीयूजी नंबर कुछ देर तक बिजी बताने के बाद स्विच ऑफ हो गए। इससे लोगों को और ज्यादा परेशानी हुई।
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नगर पालिका से भी पल्ला झाड़ा
शहर में अधिकतर नलकूप बिजली के सहारे चल रहे हैं। सिर्फ दो नलकूपों पर ही पेयजल सप्लाई के लिए जेनरेटर लगाए हैं। बिजली न होने पर नलकूपों से पेयजल की सप्लाई भी ठप हो जाती है। सावन के महीने में सुबह के समय में लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नगर पालिका ने भी पल्ला झाड़ लिया है। जिससे शहर की पेयजल सप्लाई बिजली के सहारे ही रह गई है।