गरीबों के मुंह का निवाला खुले आसमान के नीचे रखा होने के कारण भीग गया। गेहूं की बोरियां इस कदर सड़ गई हैं कि दूर से बदबू आने लगी है। सपा नेता ओमकार सिंह ने मामले की जांच कराने की मांग की है। उधर, तिकुनियां के उपभोक्ताओं ने सड़ा गेहूं लेने से मना कर दिया।
कस्बे से सटे गांव प्रीतमपुरवा में एपीएल और बीपीएल के करीब पांच हजार क्विंटल गेहूं का गोदाम के बाहर जमीन पर बिना कुछ बिछाए चट्टा लगा दिया गया है। अधिक वर्षा होने पर गोदाम प्रभारी ने उस पर खानापूर्ति के लिए तिरपाल डाल दिया। तेज हवा चलने के कारण वह तिरपाल भी उड़ गया। वर्षा के चलते बोरियों के चट्टे नीचे और ऊपर दोनों तरफ से भीग गए, जिसके चलते गेहूं सड़ गया। आरोप है कि कोटेदारों पर दबाव बनाकर वही सड़ा गेहूं दिया गया। सयुस विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष ओमकार सिंह ने बताया कि तिकुनियां में सड़े गेहूं का वितरण किया गया। उसमें इतनी बदबू आ रही थी कि उसे जानवरों के सामने डाला गया तो उन लोगों ने भी नहीं खाया, इस गेहूं को वहां लोगों ने लेने से इनकार कर दिया।
सप्लाई इंस्पेक्टर पीके सुधाकर के अनुसार अधिक गेहूं आने के कारण गोदाम में जगह नहीं रह गई थी, इसलिए बाहर लगवाया गया था। यह सच है कि गेहूं भीग गया है। सड़ा गेहूं कोटेदार को नहीं दिया जाएगा।