प्रदूषण से जहरीला हुआ
उल्ल नदी का पानी
जंगल की लाइफ लाइन कही जाती है यह नदी
पानी जहरीला होने से जैव विविधता पर पड़ रहा प्रभाव
जंगल की लाइफ लाइन कही जाने वाली उल्ल नदी का पानी प्रदूषण के कारण जहरीला हो चला है। शहर के पास से होकर बहने वाली उल्ल नदी का बड़ा हिस्सा जंगल से होकर बहता है। शहर के कूड़े और गंदे पानी के साथ औद्योगिक कचरे से पटती जा रही इस नदी का पानी जानवरों के भी पीने लायक नहीं बचा है। पानी के दूषित होने से नदी और आस-पास की जैव विविधता भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
नदी, पीलीभीत जिले से निकलकर दक्षिण खीरी वन प्रभाग के बीच से गुजरकर गोला होते हुए लखीमपुर के उत्तर दिशा से निकलकर सीतापुर जिले में जाकर शारदा नदी से मिलती है। जिले में इस नदी की लंबाई करीब 95 किलोमीटर है। नदी दक्षिण खीरी वन प्रभाग के भीरा और मैलानी रेंज के घने जंगलों से होकर गुजरती है। कभी पानी न सूखने के कारण इसे जंगल की लाइफ लाइन कहा जाता है। जंगल में नदी की स्थिति बेहतर स्थिति में है।
--
शहर के पास नाले में तब्दील हो रही उल्ल नदी
शहर में आबादी के निकट से होकर बहने वाले उल्ल नदी पूरी तरह गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है। शहर का पूरा कूड़ा कचरा और गंदा पानी उल्ल नदी में आकर गिरता है। नदी का यह हिस्सा कचरे से पट गया है। पास के एक चीनी मिल का औद्योगिक कचरा भी इसी नदी में गिरता है। इस कचरे के साथ चीनी साफ करने के लिए जो हानिकारक रसायन इस्तेमाल होता है वह भी औद्योगिक कचरे के साथ नदी के पानी में आ रहा है। डिटर्जेंट का रसायन भी नदी के पानी को प्रदूषित कर रहा है।
--
नष्ट हो रही उल्ल नदी की जैव विविधता
जानेमाने पर्यावरणविद और राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि प्रदूषण के कारण उल्ल नदी का पानी जहरीला हो रहा है। इससे नदी की जैव विविधता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस नदी में विभिन्न प्रजातियों की मछलियां काफी संख्या में थीं। इससे यहां जलीय पक्षियों की बहुतायत भी थी। पानी जहरीला हुआ तो नदी से मछलियां ही गायब हो गईं। इससे जलीय परिंदों की संख्या में भी कमी आई है।
--
जंगल में भी सूख रही उल्ल नदी
शारदा नदी में हर साल आने वाली बाढ़ से जंगल से गुजरने वाली उल्ल नदी में सिल्ट जमा हो गई है। नदी उथली हो जाने से उल्ल नदी में भी पानी कम हो गया है। इससे जंगल में भी पानी का संकट पैदा हो गया है। अपनी प्यास बुझाने के लिए जंगली जानवरों को जंगल के बाहर भटकना पड़ रहा है।
--
कभी नहीं हुई उल्ल नदी के पानी की जांच
चार साल पहले उल्ल नदी का पानी पीने से कई भैंसे मर गई थीं। इसके बावजूद प्रदूषण विभाग ने कभी उल्ल नदी के पानी की गुणवत्ता की जांच नहीं की। इस नदी को बचाने को न प्रदूषण विभाग सामने आया न प्रशासन।