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जिला पंचायत अध्यक्ष के नामांकन में सपा-भाजपा का शक्ति प्रदर्शन, तीन ने दाखिल किए पर्चे

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लखीमपुर खीरी। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए शनिवार को कलक्ट्रेट में हंगामे के बीच तीन नामांकन पत्र दाखिल कि ए गए। सपा से अंजलि राज, भाजपा से ओम प्रकाश भार्गव और सुशीला देवी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया। नामांकन के दौरान सपा और भाजपा ने शक्ति प्रदर्शन किया। दोनों ही पार्टियों के प्रत्याशी कार्यकर्ताओं की अच्छीखासी संख्या के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे थे। गेट पर रोके जाने पर सपा कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। बमुश्किल पुलिस ने उन्हें रोका।
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कलक्ट्रेट स्थित डीएम कोर्ट में नामांकन स्थल पर सबसे पहले सपा प्रत्याशी अंजलि राज नामांकन पत्र जमा करने पहुंचीं। उनके साथ प्रस्तावक समेत कुछ समर्थक थे। पुलिस के अलर्ट होने से ज्यादा समर्थक अंदर नहीं घुस पाए। प्रत्याशी अंजलि राज ने कुल चार सेट नामांकन पत्र जमा किए। इसके बाद सपा से जुड़ी सुशीला देवी ने एक सेट नामांकन जमा किया। यह दोनों प्रत्याशी सपा के पूर्व विधायक सुनील भार्गव लाला की बहुएं हैं, जो मितौली क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुईं हैं। भाजपा की ओर से घोषित प्रत्याशी ओमप्रकाश भार्गव काफिले के साथ कलक्ट्रेट गेट तक पहुंचे, जिसके बाद भाजपा विधायकों व समर्थकों के साथ नामांकन स्थल पहुंचे। प्रत्याशी ओमप्रकाश भार्गव ने दो सेट नामांकन पत्र जमा किए।
भाजपा और सपा के प्रत्याशियों के समर्थन में गांवों से बुलाए गए कार्यकर्ता भी इकट्ठा हुए। सपा प्रत्याशी के समर्थक लोहिया भवन में एकत्र हुए, जबकि भाजपा के समर्थकों सहित विधायक व सांसद भाजपा के पुराने कार्यालय पर एकत्र हुए। इसके बाद काफिले संग कलक्ट्रेट गेट पर पहुंचे। इस दौरान दोनों दलों के समर्थकों ने नारेबाजी की, जो देखते ही देखते जोरदार हंगामे में तब्दील हो गई। भाजपा और सपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। एक-दूसरे के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने से भी लोग नहीं चूके। करीब आधे घंटे तक हंगामा चला। पुलिस बल को काफी मशक्कत करनी पड़ी, तब जाकर हालात काबू में आए। हिंदू युवा वाहिनी के जिला प्रभारी विपिन मिश्रा ने आरोप लगाया है कि सपा के कार्यकर्ता हजारों की संख्या में पहले से ही पूर्व नियोजित तरीके से विवाद करने की मंशा से खड़े थे। आरोप है कि सपा कार्यकर्ताओं में शामिल कुछ लोगों ने आपत्तिजनक नारे लगाए, जिसका भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया और उन्होंने भी नारे लगाए। आरोप है कि इस दौरान सपा के पूर्व विधायक डॉ आरए उस्मानी ने गोली मारने की धमकी दी। जिला प्रभारी विपिन मिश्रा ने पूर्व विधायक के खिलाफ पुलिस को तहरीर भी दी।
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इधर, डॉ. आरए उस्मानी का कहना है कि नामांकन में हजारों लोग थे। मैने किसी से कुछ नहीं कहा और न ही किसी से बातचीत हुई। प्रशासन मौके पर वीडियोग्राफी करा रहा था, जिससे सारी बात साफ हो जाएगी। हिंदू युवा वाहिनी के जिला प्रभारी को पहचानता नहीं हूं और न ही उनके कोई बातचीत हुई है। आरोप निराधार हैं।
कुल तीन प्रत्याशियों ने सात सेट नामांकन पत्र के जमा किए थे। जांच में तीनों नामांकन पत्र वैध पाए गए हैं। भाजपा और सपा के अलावा एक निर्दलीय प्रत्याशी ने भी नामांकन कराया है।
-डॉ अरविंद कुमार चौरसिया, डीएम/निर्वाचन अधिकारी
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सपा प्रत्याशी ने भाजपा प्रत्याशी पर लगाया सूचना छिपाने का आरोप
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सपा प्रत्याशी अंजलि राज ने भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश भार्गव के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई, जिसमें भाजपा प्रत्याशी पर नामांकन पत्र के साथ जमा शपथ पत्र में अपराध के मामले की सूचना छिपाने का आरोप लगाया गया, जिसे सहायक निर्वाचन अधिकारी ने खारिज कर दिया।
अंजलि का कहना है कि भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश भार्गव के खिलाफ थाना मितौली में दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत वर्ष 2000 में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में अपर सत्र न्यायालय ने 23 अप्रैल 2003 में उन्हें दोषी करार देते हुए 10 साल का कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी ने वार्ड 42 मितौली द्वितीय से मुकदमा धारा 304 बी को छुपाकर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव झूठा शपथपत्र देकर जीता है। इस आधार पर जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव अवैध है। यह भी आरोप लगाया कि शपथपत्र अपूर्ण व झूठा प्रस्तुत किया गया है, क्योंकि उसमें सजा और जमानत का उल्लेख नहीं किया गया है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 (3) के अनुसार यदि किसी को दो वर्ष से अधिक सजा हुई है, तो वह निर्वाचन लड़ने के लिए अपात्र है। इस आधार पर नामांकन पत्र निरस्त करने किया जाए।
आपत्ति में 10 वर्ष की सजा होना बताया गया है, जो जांच में गलत पाया गया। ओमप्रकाश को न्यायालय द्वारा 2003 में दो वर्ष नौ माह की सजा सुनाई गई थी और 100 रुपये जुर्माना लगाया गया था। इसके बाद से काफी समय बीत चुका है, जबकि सजा के छह वर्ष बाद चुनाव लड़ा जा सकता है। इसलिए आपत्ति को खारिज कर दिया गया है।
-अरुण कुमार सिंह, एडीएम/ सहायक निर्वाचन अधिकारी
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सपा प्रत्याशी की ओर से दायर आपत्ति निराधार है। 18 साल पहले 2003 में सजा हुई थी। 10 वर्ष की सजा के बाद छह वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। कोई भी सजा होने के छह वर्ष बाद चुनाव लड़ सकता है। इसलिए निर्वाचन अधिकारी ने आपत्ति खारिज कर दी है।
-सुनील सिंह, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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सत्ता के मद में भाजपा ने सजायाफ्ता दहेज हत्या के आरोपी को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाकर साबित कर दिया कि कानून व्यवस्था भाजपा के लिए सिर्फ विपक्ष को दबाने का हथियार है। भाजपा ने कारिंदे को, तो समाजवादी पार्टी ने मातृशक्ति को प्रत्याशी चुना है। अब फैसला जनता के हाथ है। भाजपा प्रत्याशी ओम प्रकाश द्वारा सदस्य के रूप में तथ्यों का विवरण सही नहीं दिया गया और प्रशासन द्वारा सब कुछ जान कर भी पर्चा सही किया गया। सपा इस प्रकरण को चुनाव आयोग तक ले जाएगी।
-रामपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
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भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा-विपक्ष को दिख रही हार, इसलिए लगा रहे आरोप
भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील सिंह ने शनिवार को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए ओम प्रकाश भार्गव का नामांकन कराने के बाद जिला सहकारी बैंक सभागार में पत्रकारों से वार्ता की। इसमें खीरी सांसद अजय मिश्र ने कहा कि भाजपा निष्पक्ष चुनाव में विश्वास करती है। जिला पंचायत चुनाव में पार्टी के साथ 50 सदस्य हैं। जीत पार्टी की होगी। हार से हताश एवं निराश होकर विपक्ष अनर्गल आरोप लगा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सदैव स्वस्थ परंपरा का पालन किया और निष्पक्ष ढंग से चुनाव लड़े। गिनती के सदस्य जीतने के सवाल पर सांसद बोले हमारा वोट बैंक बढ़ा है और संख्या बल भी हमारे साथ है।
जिला प्रभारी दिनेश तिवारी, सभी विधायक, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि नरेंद्र सिंह, विजय शुक्ला रिंकू, डीसीबी अध्यक्ष विनीत मनार, रमेश चंद्र मिश्रा, राम जी दीक्षित आदि मौजूद रहे। संवाद
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काउंट-डाउन शुरू...चिंता में प्रत्याशी किस करवट बैठेगा ऊंट
लखीमपुर खीरी। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए शनिवार को नामांकन होने के साथ ही सियासी माहौल में गर्माहट आ गई है। इसका ट्रेलर भी कलक्ट्रेट गेट के बाहर देखने को मिला, जब दोनों भाजपा और सपा के कार्यकर्ता आमने-सामने भिड़ गए। इससे माना जा रहा है कि तीन जुलाई 2021 को मतदान के दौरान भी गहमा-गहमी देखने को मिल सकती है, क्योंकि उस दिन दोनों दलों के बीच जबरदस्त तनाव की स्थिति बनेगी।
कुल 72 जिला पंचायत सदस्य हैं, जिसमें बहुमत के लिए 37 सदस्यों का समर्थन होना आवश्यक है। इस हिसाब से किसी भी दल के पास पर्याप्त संख्या में सदस्य नहीं है, जिससे सारा दारोमदार निर्दलियों पर है। भाजपा नेता का दावा है कि उनके पास 45 सदस्यों का समर्थन है, जबकि सपा का दावा है कि उसके पास भी बहुमत से अधिक सदस्यों का समर्थन है। बसपा ने अपने सदस्यों को मनमुताबिक वोट देने के लिए छोड़ दिया है। सूत्रों की माने तो बसपा के समर्थन से जीते सदस्य भाजपा को सपोर्ट कर सकते हैं।
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कुल जिला पंचायत सदस्य 72
भाजपा 07
भाजपा के बागी 05
सपा 14
बसपा 09
अपना दल 01
निर्दलीय 36
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