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पलिया के राजेश प्रजापति का पीएम मोदी ने मन की बात में किया जिक्र

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राजेश प्रजापति।
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राजेश बोले, आयुष्मान कार्ड से बिना पैसा लगे हो गया पूरा इलाज
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राजेश ने पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह गरीबों के लिए बहुत अच्छी योजना
पलिया (लखीमपुर खीरी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम में खीरी के पलिया निवासी राजेश प्रजापति का जिक्र किया है। हर महीने के आखिरी रविवार को होने वाले मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने पलिया के राजेश प्रजापति का न सिर्फ जिक्र किया, बल्कि उनसे बातचीत भी की।
पलिया के बाजार मोहल्ला निवासी राजेश प्रजापति ने पीएम मोदी को बताया कि सरकार के आयुष्मान कार्ड की वजह से उसे काफी लाभ हुआ है। राजेश ने पीएम मोदी को बताया कि उसे पहले सीने में जलन होती थी। डॉक्टर ने एसिडिटी की शिकायत बताते हुए उसकी लंबी दवा की। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। राजेश ने बताया कि इस पर उसने बरेली के एक निजी अस्पताल में दिखाया, जिस पर अस्पताल ने एंजियोग्राफी कराने की बात कहते हुए लंबा चौड़ा खर्च बता दिया।
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राजेश बताते हैं कि एंजियोग्राफी के बाद नसों में ब्लॉकेज निकला। राजेश ने बताया कि उससे डॉक्टरों ने पूछा कि क्या उनके पास आयुष्मान कार्ड है। इस पर राजेश ने हामी भरी तो उसका इलाज आयुष्मान कार्ड से हो गया और उसका एक पैसा नहीं लगा। राजेश ने पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह गरीबों के लिए बहुत अच्छी योजना है। राजेश ने पीएम को इसके लिये धन्यवाद दिया तो पीएम मोदी ने भी राजेश से आयुष्मान योजना के बारे में लोगों को बताने की अपील की, जिससे ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद लोगों को इससे लाभ मिल सके।
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काफी दयनीय है राजेश की माली हालत
पलिया। राजेश प्रजापति 48 वर्ष कपड़े की दुकान पर काम कर अपना गुजारा करते हैं। परिवार में दंपती समेत कुल छह लोग हैं। दो बड़ी बेटियां, फिर बेटा और उसके बाद फिर एक छोटी बेटी है। राजेश के बेटे ने बताया कि, उसके पिता रेडीमेड की दुकान पर काम करते हैं, उसी से परिवार चल रहा था। बताया कि जमीन विवादित है, जिससे वह उसका कोई लाभ नहीं ले पा रहे। यह भी बताया कि पिता जी काफी बीमार चल रहे थे, इसलिये काफी दिन से ढंग से नौकरी भी नहीं कर पा रहे थे। उधर, परिवार में तीन लड़कियों में किसी का विवाह नहीं हुआ है। इससे परिवार आर्थिक चिंता के साथ साथ सामाजिक दबाव भी झेल रहा था, लेकिन आयुष्मान कार्ड से इलाज हो गया। परिजन का कहना है कि, इलाज के लिये पहले भी काफी कर्ज लिया जा चुका था।
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