झुलसे मजदूर को जिला अस्पताल में कराया भर्ती
फायर ब्रिगेड ने तीन घंटे बाद आग पर पाया काबू
गोला रोड स्थित एक प्लाईवुड फैक्ट्री में शुक्रवार की दोपहर अचानक आग लग गई। आग के बीच फंसकर दो मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। फैक्ट्री मालिक ने झुलसे दोनों मजदूरों को अलग-अलग अस्पताल में भर्ती कराया, जिसमें गंभीर रूप से झुलसे रमेश उर्फ मुन्ना की शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में मौत हो गई, जबकि दूसरा मजदूर जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।
शहर निवासी नर सिंह अग्रवाल की गोला रोड पर एनके इंड्रस्ट्रीज के नाम से प्लाईवुड फैक्ट्री है। शनिवार की दोपहर में फैक्ट्री में अचानक आग लग गई। इससे अफरा-तफरी मच गई। मजदूर और अन्य लोग जब तक कुछ समझ पाते, इससे पहले तेज हवाओं के चलने के कारण आग ने विकराल रूप से लिया। फैक्ट्री में काम कर रहे सदर कोतवाली के पिपरिया निवासी पूर्व प्रधान राममूर्ति वर्मा का पुत्र 48 वर्षीय रमेश उर्फ मुन्ना और यहीं के रामभजन का 36 वर्षीय पुत्र रमेश आग की लपटों में घिर गए, जिससे दोनों गंभीर रूप से झुलस गए। फैक्ट्री मालिक ने आनन-फानन में रमेश उर्फ मुन्ना को शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में, जबकि रमेश को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। रमेश उर्फ मुन्ना ने प्राइवेट अस्पताल में दम तोड़ दिया। इधर सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने करीब तीन घंटे से अधिक समय में आग पर काबू पाया। पुलिस ने शव को मोरचरी में रखवा दिया है।
मौत होने के कई घंटे बाद घर वालों को दी सूचना
गांव पिपरिया निवासी रामभजन ने बताया कि उनका पुत्र रमेश और पूर्व ग्राम प्रधान का पुत्र रमेश उर्फ मुन्ना दोनोें करीब 25 साल से नर सिंह अग्रवाल की प्लाईवुड फैक्ट्री में मजदूरी करते थे। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री मालिक ने घटना की सूचना दोनों के परिवार वालों को नहीं दी। मृतक रमेश उर्फ मुन्ना के घर वालों ने बताया कि मौत होने के करीब पांच घंटे बाद घटना की जानकारी दी गई।
अस्पताल में शव छोड़ने का लगाया आरोप
मृतक मजदूर के परिवार वालों का आरोप है कि प्राइवेट अस्पताल में मौत होने के बाद फैक्ट्री मालिक रमेश उर्फ मुन्ना का शव लेकर इमरजेंसी पहुंचे, जहां डॉक्टर के मृत घोषित करने पर शव छोड़कर भाग निकले। अस्पताल प्रशासन ने शव को मोरचरी में रखवाया।
प्लाईवुड फैक्ट्री में लगी आग की जांच की जा रही है। आग किन कारणों से लगी है, यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा।
दीपक शुक्ल, सदर कोतवाल