एकाध बच्चों को भर्ती कराकर आशाएं कर रही खानापूर्ति
आठ भर्ती बच्चों में से अधिकतर को डॉक्टर ने किया रेफर
जिला अस्पताल के पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती बच्चों के लिए कुपोषण मिटाने के लिए चल रही योजनाएं का लाभ बच्चों को कितना मिल रहा है, इसका अंदाजा केंद्र पर भर्ती बच्चों को देेखरेख कर ही लगाया जा सकता है। आशाएं और आंगनबाड़ी वर्कर भी बच्चों को केंद्र में भर्ती कराने में कंजूसी बरत रही हैं। जिससे योजनाएं मुंह चिढ़ाती नजर आ रही है।
पोषण पुर्नवास केंद्र में सदर ब्लॉक के गांव जिगनिहा निवासी शिशुपाल की 16 माह की पुत्री प्रीती, शिव कॉलोनी निवासी पुत्तूलाल की तीन साल की पुत्री नीलम, फूलबेहड़ निवासी वीरू के एक साल के पुत्र अजीत, नकहा के घटपलाई निवासी संतराम के एक साल के पुत्र मोहित, ओयल के गुलरीपुरवा निवासी प्रदीप कुमार की डेढ़ साल की पुत्री डॉली, फूलबेहड़ के लौकिहा निवासी मनेष के डेढ साल के पुत्र दीपक, धौरहरा के चकलाखीपुर निवासी पुरूषोत्तम के ढाई साल के पुत्र इंद्रेश सहित फूलबेहड़ क्षेत्र निवासी हरिनाम के आठ माह के पुत्र विपिन को भर्ती किया गया है। हालांकि इन बच्चों की हालत में सुधार होना बताया जा रहा है।
पोषण पुर्नवास केंद्र की न्यूट्रीशियन दिव्या चतुर्वेदी ने बताया कि भर्ती बच्चों में से अधिकतर को डॉक्टर ने रेफर किया है, जबकि दो बच्चों को सिर्फ आशाएं लाई हैं। उन्होंने बताया कि आशाएं गांव में भ्रमण करती रहती हैं, इस दौरान यदि वह सजग हो कर कुपोषित बच्चों को केंद्र पर भर्ती कराती रहें तो कुपोषण दूर हो सकता है।
आठ बच्चे कुपोषण वार्ड में भर्ती हैं, जिनकी देखरेख की जा रही है। वार्ड में भर्ती बच्चों के घरवालों को सरकार की ओर से धनराशि भी दी जाती है।
डॉ. आईबी त्रिपाठी, बाल रोग विशेषज्ञ एवं प्रभारी पोषण पुर्नवास केंद्र