फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शायद हादसे का इंतजार कर रहा है विभाग 

Wed, 30 Nov 2016 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महेवागंज।
विज्ञापन
गैंडा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
जंगल से निकलकर अर्से से इलाके में घूम गैंडा
विज्ञापन

दो डिवीजनों के बीच अटका मामला, अब जंगल भेजने की बन रही योजना
 दुधवा जंगल से निकलकर मुख्यालय से करीब के गांवों में चहलकदमी करने वाले गैंडे की संख्या एक ही है। यह बात वन्यजीव विशेषज्ञ और वनाधिकारी मान रहे हैं। उनका यह भी मानना है कि पिछले कई माह से यह गैंडा फूलबेहड़ इलाके में भ्रमण करा रहा है। बावजूद वन विभाग ने इसे वापस जंगल में छोड़ने की कोशिश नहीं की। ग्रामीणों की माने तो विभाग शायद किसी हादसे के इंतजार में है। 
करीब चार माह पहले फूलबेहड़ क्षेत्र में शारदा बंधे के अंदर बसे बड़ा गांव भूड़ में गैंडा देखे जाने का मामला सामने आया था। ग्रामीणों मे अफरा तफरी के बाद विभाग चौकन्ना हुआ। वन कर्मियों ने बाढ़ का पानी खत्म होते ही गैंडे के वापस जंगल मे जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। इधर मुख्यालय से सटे फूलबेहड़ क्षेत्र के बुढ़नापुर, महेवा, पिपरा, बल्हवापुर और दाउदपुर मे गैंडा देखे जाने की बात फैली। सोमवार को राजापुर गांव के पास एक खेत मे पशु का मल और पग चिह्न देखे गए। वन कर्मियों ने मौका मुआयना कर क्षेत्र में गैंडा होने की पुष्टि कर दी। मंगलवार को उत्तर प्रदेश वन्य जीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य डॉ. वीपी सिंह ने भी मौका मुआयना किया। उन्होंने एक ही गैंडा होने की बात कही। फिलहाल ग्रामीण किसी अनहोनी की आशंका से भयभीत है, और वह खेतों की ओर जाने से डर रहे हैं। 
विज्ञापन

--
मामला एक-दूसरे के पाले मे डाल रहे 
दुधवा जंगल से भटक कर इस एरिया में पहुंचे गैंडा के विचरण को लेकर विभाग के दो डिवीजनों के बीच भी पेंच फंसा है। साउथ डिवीजन के अधिकारी गैंडे की आमद नार्थ मे होने, जबकि नार्थ डिवीजन के जिम्मेदार लोग गैंडे के साउथ क्षेत्र में होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। 
 
गैंडे के नार्थ डिवीजन रेंज में होने की बात पता चली है। यह उनका डिवीजन नहीं लगता। 
-अखिलेश पांडेय, डीएफओ नार्थ खीरी 
 
डीएफओ साउथ सूरज कुमार ने बताया कि गैंडे के टहलने की बात पता चली थी। अब वह नार्थ डिवीजन क्षेत्र में घूम रहा है। अगर दोबारा दिखा तो उसे जंगल मे छोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। 
विज्ञापन

 
गैडा होने की जानकारी पाकर मैं बुढनापुर-महेवा गया था। खेतों में गैंडे के पगचिह्न मिले है। कोई हादसा न हो इसके लिए गैंडे को जंगल मे छोड़ने के लिए डीएफओ से बात की गई है। 
-डॉ. वीपी सिंह, पूर्व सदस्य वन्य जीव सलाहकार परिषद उत्तर प्रदेश
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें