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बिजली कटौती से बिलबिलाए लोग

Mon, 20 Apr 2015 06:55 PM IST
लखीमपुर खीरी।
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गर्मी बढ़ने पर लखीमपुर शहर और गोला में रातभर बिजली कटौती होने से लोग परेशान हो गए। बिजली न मिलने के कारण उन्हें पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ी। बार-बार बिजली की कटौती होने से लाइनों पर लोकल फॉल्ट और ट्रिपिंग की समस्या भी बढ़ती जा रही है। हैरत की बात यह है ऐसे हालातों से निपटने के लिए बिजली विभाग की ओर से कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।
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लखीमपुर शहर में दो चरणों में होने वाली बिजली कटौती के अव्यवस्थित शेड्यूल (रात 11 बजे से चार बजे तक) से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रविवार की रात तो निर्धारित शेड्यूल से एक घंटे पहले यानि 10 बजे ही बिजली काट दी गई। इसके बाद साढ़े चार बजे सप्लाई बहाल हुई। इसके बाद भी लगातार ट्रिपिंग होती रही। सोमवार को दिन में भी कई घंटे बिजली की कटौती के कारण लोगों को परेशान होना पड़ा। वहीं गोला में हाल में ही तहसील परिसर में बने 33/11 केवी उपकेंद्र इस कदर ओवरलोड हो गया कि यहां से संचालित चार फीडरों को एक साथ बिजली सप्लाई करना मुश्किल हो गया। इससे गोला कस्बे के चारों फीडर रात भर बंद रहे, जिसकी वजह से लोगों को पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ी।
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लखीमपुर और गोला में बढ़ेगी बिजली की समस्या
दोनों जगहों पर बिजली की समस्या यूं ही नहीं है। अधिकारियों की बेपरवाही इस समस्या को और बढ़ावा दे रही है। बिजली खपत के आंकड़ों पर गौर करें तो मौजूदा समय में लखीमपुर शहर का बिजली लोड 60 एमवी है। गर्मी बढ़ने पर शहर का बिजली लोड 80 से 90 एमवी तक बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति बिजली विभाग के पास संसाधनों की भारी कमी है। वहीं गोला कस्बे का बिजली लोड 13 एमवी है, लेकिन पूरे कस्बे की बिजली सप्लाई केे लिए सिर्फ 10 एमवी क्षमता का मात्र एक ट्रांसफार्मर लगा है। नए ट्रांसफार्मर के लिए एस्टीमेट बनाकर भेजा गया है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के चलते नए ट्रांसफार्मर को अभी तक स्वीकृत नहीं मिल पाई है। इसकी वजह से गर्मी बढ़ने के साथ ही लोगों की परेशानियां और बढ़ेंगी।
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योजना के क्रियान्वयन में देरी से बढ़ी परेशानी
लखीमपुर शहर में बिजली सुधार के लिए वर्ष 2014 में एपीडीआरपी योजना शुरू की गई। पिछले साल गर्मी में जब भी कहीं समस्या आई तो इसी योजना के उपकरण लगाए गए। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि वर्ष 2015 तक काफी सुधार हो जाएगा, लेकिन करीब डेढ़ साल गुजरने के बाद भी हालात जस के तस हैं। गौरतलब है कि योजना में शहर में 242 ट्रांसफार्मर लगने थे, लेकिन सिर्फ 86 ट्रांसफार्मर ही लग पाए हैं। 75 किलोमीटर में सिर्फ 25 किलोमीटर ही एबीसी कंडक्टर बिछ पाया है। 20 किलोमीटर तक जर्जर तार बदला जाना था, लेकिन अभी तक एक किलोमीटर भी नई लाइन नहीं बिछाई जा सकी है। वहीं, 1000 बिजली पोल की जगह अभी 300 पोल ही लग पाए हैं। इससे साफ है कि बिजली विभाग लोगों की परेशानियों की ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
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बिजली कटौती से गुस्से में हैं लोग
शहर में बिजली कटौती को लेकर लोग काफी गुस्से में हैं। लोगों का कहना है कि गर्मी आते ही बिजली अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से भागने लगते हैं। इसकी वहज से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दुकानदार सबलू पुरी का कहना है कि बिजली कटौती से रात में सोना मुश्किल हो गया है। वहीं गृहणी पूनम मिश्रा कहती हैं कि बिजली की कटौती से पेयजल समस्या हो जाती है। सुबह बिजली कटौती होने से पानी भी नहीं मिलता। व्यापारी सुधाकर जायसवाल का कहना है कि गर्मी में बिजली किल्लत शुरू होने पर ही बिजली विभाग सुधार करवाने की बात करता है। इससे पहले कोई ध्यान नहीं देता। वहीं, संकटा देवी के राजेंद्र प्रसाद बबलू का कहना है कि बिजली किल्लत बढ़ने से लोगों की दिनचर्चा पर इसका बुरा असर पड़ रहा है।
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