बताते चलें कि प्रदेश सरकार ने 21 जनवरी से पॉलिथीन के प्रयोग पर रोक लगा दी है। खास बात यह है कि इसके लिए जिला प्रशासन या अन्य किसी संस्था ने शहर में कोई अभियान नहीं चलाया। पॉलिथीन का प्रयोग बंद करने में शहर के दुकानदारों ने ही अपनी जिम्मेदारी निभाई। कई दुकानदारों ने यहां तक किया कि अपने यहां बोर्ड टंगवा दिया कि उनके यहां पॉलिथीन में सामान नहीं दिया जाता है। पॉलिथीन के प्रयोग बंद के दिन से ही शहर के जागरूक दुकानदारों ने इस पर अमल करना शुरू कर दिया। पॉलिथीन का सबसे ज्यादा प्रयोग दूध विक्रेता करते थे, लेकिन दूध विक्रेताओं ने अपने यहां पॉलिथीन का प्रयोग पूरी तरह से बंद कर दिया। आदतन खाली हाथ दूध की दुकान पर जाने वाले लोगों को निराशा हाथ लगी। उन्हें दूध नहीं मिल पाया, वापस लौटना पड़ा। जब वे बर्तन लाए तभी उन्हें दूध मिल सका। सब्जीमंडी में भी तमाम दुकानदारों ने लोगों को पॉलिथीन में सब्जी नहीं दी। पॉलिथीन को लेकर पटरी और छोटे दुकानदारों में भी जागरूकता देखने को मिली। पॉलिथीन प्रयोग बंद होने से अखबारी रद्दी और लिफाफों का प्रयोग फिर से शुरू हो गया है। तमाम छोटे दुकानदार लिफाफों में सामान बेचते दिखे तो बड़े दुकानदार अपने यहां पेपर बैग ले आए उन्होंने पेपर बैग में सामान देना शुरू कर दिया। गली मोहल्लों में अधिकतर छोटे दुकानदारों ने पॉलिथीन का प्रयोग बंद कर दिया है।
लिफाफों की भी बिक्री बढ़ी
पॉलिथीन का प्रयोग कम होने से बाजार में कागज के लिफाफों की मांग बढ़ गई है। रानीगंज के रद्दी कागज और अखबार के कारोबारी मोहम्मद यूनुस बताते हैं कि लिफाफे की मांग बढ़ने से पुराने अखबार की डिमांड बढ़ गई है। अब उनके पास पुराने अखबार की बिक्री खूब हो रही है।
अमर उजाला ने की पहल
समय-समय पर सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभाने वाले अमर उजाला ने रविवार को पॉलिथीन से नुकसान के प्रति जागरूक करने और प्रशासनिक अमले को चेताने वाली खबर प्रकाशित की थी। खबर को लोगों ने हाथों-हाथ लिया। इससे जागी संवेदना से आलम यह रहा कि दुकानदार ही नहीं ग्राहक भी सामान लेने के लिए थैले का प्रयोग कर रहे हैं। वहीं दुकानदारों ने पॉलिथीन से तौबा कर ली।