पसगवां। पगसवां कांड में सोमवार को दोनों पीड़ित महिलाओं के कोर्ट में 164 के बयान हो हो चुके हैं। मंगलवार को अपर जिलाधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ब्लॉक कार्यालय पहुंचे और महिलाओं के बयान लिए।
आठ जुलाई को ब्लॉक प्रमुख पद के नामांकन के दौरान सपा समर्थित प्रत्याशी और उसकी प्रस्तावक के साथ बदसलूकी और साड़ी खींचने का मामला प्रकाश में आने के बाद पीड़िताओं की तहरीर पर पुलिस तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। वहीं इस मामले में शुक्रवार को मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए गए थे। इसके बाद डीएम डॉ. अरविंद चौरसिया ने एडीएम और एएसपी के नेतृत्व में जांच टीम गठित की थी।
मंगलवार को दोनों अधिकारी जांच के लिए ब्लॉक कार्यालय पहुंचे और बीडीओ अशोक कुमार सिंह, पीड़ित महिलाओं व सपा नेता क्रांति सिंह से सवाल जवाब कर उनके बयान दर्ज किए।
नामांकन के दौरान सीसीटीवी कैमरे से भी की गई छेड़छाड़
पसगवां। पीड़िताओं के 161 और 164 के बयान के बाद अब पुलिस ने घटना से जुड़े वीडियो, तस्वीरों और अन्य संदिग्धों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, पीड़िताओं के हुए 164 के बयान में कई बड़े नेताओं की भूमिका भी प्रकाश में आ रही है। हालांकि, मामले में पुलिस कुछ भी कहने से बच रही है। वहीं, इस मामले में पुलिस की सख्त भूमिका से कई बड़े नेता सामने आने से बच रहे हैं। उधर, सूत्रों का यह भी कहना है नामांकन के दिन सीसीटीवी कैमरों में छेड़छाड़ की गई। आरोप है कि इस दौरान एसडीएम स्वाति शुक्ला भी मौजूद थीं। संवाद
लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही भाजपा: सपा
पसगवां। सपा नेता क्रांति कुमार सिंह का कहना है कि भाजपा और सरकार के लोग लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तमाम धमकियां और प्रलोभन दिए जा रहे हैं, जिसकी शिकायत पर शासन ने उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई है। उन्होंने कहा कि जांच के लिए डीएम ने एडीएम अरुण कुमार सिंह और एएसपी अरुण कुमार सिंह के नेतृत्व में संयुक्त टीम का गठन किया है, उम्मीद है जल्द न्याय मिलेगा। उनका कहना है कि न्याय न मिलने पर माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि नामांकन के दिन सीसीटीवी कैमरे चल रहे थे या नहीं, यह तो केवल बीडीओ ही बता सकते हैं। यदि घटनाक्रम रिकार्ड हुआ है तो उन्हें जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नामांकन के एक दिन पहले एआरओ का बदलना संदेह उत्पन्न कर रहा है। संवाद
पसगवां कांड का एक और विडियो वायरल
लखीमपुर खीरी। पसगवां कांड में पुलिस जहां तेजी से जांच कर आरोपियों की धड़पकड़ कर रही है, वहीं घटना के छह दिन बीत जाने के बाद उससे जुड़े विडियो लगातार वायरल हो रहे हैं। अब पसगवां कांड से जुड़े नए वायरल विडियो में भाजपा सांसद एसओ को डपटती नजर आ रही हैं। जिला प्रभारी दिनेश तिवारी का कहना है कि सपाइयों ने शुरुआत की थी, बाकी सब क्रिया की प्रतिक्रिया है।
आठ जुलाई के इस वीडियो में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा के समर्थक परिसर के अंदर जाने और परिसर से किकी को बाहर निकालने की जिद करते दिखाई दे रहे हैं, जिस पर एसओ आदर्श कुमार सिंह उन्हें रोकने की कोशिश करते दिख रहे हैं।
समर्थकों की बात न सुनता देख धौरहरा सांसद और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा भी झल्ला उठती हैं और तत्कालीन एसओ आदर्श कुमार सिंह को डपट देती हैं। इसके बाद उनके कई समर्थक हंगामा करते हुए ब्लॉक परिसर में दाखिल हो जाते हैं, जिन्हें रोकने में पुलिस नाकाम रहती है।
पहले वीडियो में नामांकन कक्ष के बाहर दिखी थीं रेखा वर्मा
इससे पहले भी पसगवां कांड का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें भाजपा सांसद रेखा वर्मा अपने कार्यकर्ताओं के साथ पसगवां ब्लॉक के अंदर आरओ कक्ष के ठीक बाहर खड़ी दिखाई दे रही हैं। वह सपा प्रत्याशी को आरओ कक्ष में न जाने देने की बात भी करती नजर आ रहीं हैं।
वीडियो में तहसीलदार विकासधर द्विवेदी जब सपा प्रत्याशी को लेकर सुरक्षा के बीच आरओ कक्ष तक लेकर जाते हैं तो फिर से भाजपा कार्यकर्ता सपा प्रत्याशी के सामने खड़े हो जाते हैं। इसी बीच वीडियो में सफेद साड़ी में बीजेपी सांसद रेखा वर्मा भी नजर आ रही हैं। यहां बता दें कि पीड़ित सपा प्रत्याशी ने उनके सामने ही भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा बदसलूकी और साड़ी खींचने का आरोप लगाया था। संवाद
प्रदेश नेतृत्व के संज्ञान में है मामला: दिनेश
भाजपा के जिला प्रभारी दिनेश दिवारी का कहना है कि जो कुछ हुआ वह निश्चित अनुचित है, लेकिन सपा प्रत्याशी के साथ क्रांति सिंह भी अंदर थे, जिन्हें बाहर निकालने की समर्थक मांग कर रहे थे। शुरुआत सपा की तरफ से ही की गई थी, इसलिये क्रिया की प्रतिक्रिया हुई। अगर पुलिस सपा प्रत्याशी के साथ क्रांति सिंह को अंदर नहीं जाने देती, तो ऐसी कोई घटना नहीं होती। उन्होंने बताया कि मामले को पार्टी के क्षेत्रीय और प्रदेश अध्यक्ष के संज्ञान में लेकर आया गया है। इस पर शीर्ष नेतृत्व ही फैसला करेगा।