चीन और वियतनाम में है बेहद मांग
वन्यजीव विशेषज्ञ पीसी पांडेय का कहना है कि दुधवा के जंगलों से पैंगोलिन का शिकार करने के बाद तस्कर नेपाल के रास्ते से चीन और वियतनाम ले जाकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। वहां लोग इसका मांस बड़े चाव से खाते हैं। शरीर के हर अंग का इस्तेमाल करते हैं। विभिन्न रोगों के लिए मांस की दवाई बनाई जाती है।
पौरूष शक्ति को बढ़ाने के लिए भ्रूण को शराब व सूप में मिलाकर पीते हैं। शरीर का ऊपरी हिस्सा (स्केल) बेहद मजबूत होता है, जिससे वहां के लोग पैंगोलिन के आभूषण पहनना अपनी शान समझते हैं। अंधविश्वास और तंत्र मंत्र के चक्कर में नाखूनों को बच्चों के गले में पहनाते हैं।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ संजय बिश्वाल ने बताया कि गोला रेंज में मिला पैंगोलिन शेड्यूल एक का वन्यजीव है। वन कर्मियों की टीम ने उसे पकड़कर जंगल में छोड़ा है। उसके संरक्षण और संवर्धन के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।