गोला गोकर्णनाथ। गांव में ब्याह कर आईं शिक्षित बहुएं, बेटियां अपनी घर गृहस्थी की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहीं हैं। ऐसे महिलाएं गांव की जिम्मेदारी भी बखूबी संभाल सकती हैं। लेकिन उन्हें मौका दिया जाना चाहिए। महिलाओं का कहना है कि गांव का प्रधान शिक्षित हो, जो गांव में विकास की योजनाएं लेकर आए। यदि महिला प्रधान बनें तो वह अपने पति, प्रतिनिधि के भरोसे न रहकर गांव के विकास में स्वच्छंद निर्णय लेने में सक्षम हो।
गांव की प्रधानी में महिलाओं को आगे आना चाहिए। प्रधान बनने के बाद उन्हें अपनी जिम्मेदारी स्वयं निर्वहन करनी चाहिए, न कि अपने पति और प्रतिनिधि पर निर्भर रहकर। जब गांव की प्रधान महिला होगी तो गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित होंगी और वह अपनी बात महिला प्रधान से कह सकेंगी। -सीमा देवी, भीखमपुर
सरकार ने महिलाओं के लिए आरक्षण हर क्षेत्र में लागू तो कर दिया है किंतु अधिकतर महिला प्रत्याशियों के चुनाव संबंधी कार्य उनके घर के पुरुष ही करते हैं। चुनाव जीतने के बाद भी वही लोग जिम्मेदारी संभालते हैं, महिला प्रधान की भूमिका मात्र चेक पर साइन करने तक ही सीमित रह जाती है। -नीलम जायसवाल, संसारपुर
ग्राम प्रधान के लिए भी योग्यता निर्धारित होनी चाहिए, जिससे वह शिक्षा का महत्व समझ सके। आरक्षण की वजह से अक्सर कम पढ़े लिखे, अनपढ़ लोग ग्राम प्रधान चुन लिए जाते हैं। जिससे शिक्षित लोगों की भावनाओं को ठेस लगती है। प्रधान शिक्षित हो, जो विकास की मुख्य धारा से गांव को जोड़ सके। -अलका मिश्रा, पड़रिया तुला
ग्राम पंचायतों में प्रधानी के चुनाव में महिला प्रत्याशी का नाम तो है किंतु पोस्टरों पर फोटो में पति और प्रतिनिधि चमक रहे हैं, जो जीतने पर प्रधानी चलाते हैं। बेचारी महिला प्रधान होते हुए भी चौका चूल्हा तक सीमित रह जाती है। इस बार चुनाव में कई महिला प्रत्याशी हैं, लेकिन वोट उसी को जो स्वयं प्रधानी चलाने और निर्णय लेने में सक्षम हो। -शिप्रा, गुप्ता कॉलोनी पुनर्भूग्रंट
महिला आरक्षण मात्र दिखावा साबित हो रहा है। प्रशासनिक सख्ती न होने से महिला जनप्रतिनिधियों के अधिकतर काम पुरुष प्रतिनिधि ही निभाते हैं। ऐसे में महिला सशक्तीकरण भी धरातल पर सफल नहीं हो रहा है। शासन को चाहिए कि चुनाव जीतने के बाद महिला प्रतिनिधि से ही गांव के विकास और बैठकों में जाने की अनुमति दी जाए। -सुनीता शुक्ला, बस्तौली अमीरनगर
गांव का प्रधान ईमानदार एवं सबको साथ में लेकर चलने वाला हो। विशेषकर गरीबों की बात सुनने, समझने और उनकी बातों पर अमल करने वाला हो। सरकार की तरफ से मिलने वाला लाभांश बिना किसी रिश्वत के उन्हें भी मिले। साथ ही जब उन्हें किसी विशेष कार्य की आवश्यकता हो तो बिना देर के ग्राम प्रधान उनकी सेवा में तत्पर रहे। - कल्पना तिवारी, अलीगंज