पलिया मंडी समिति में बने केन्द्र पर होती धान खरीद।
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पलियाकलां। सरकारी धान खरीद शुरू हुए नौ दिन हो गए हैं। पहले तीन-चार दिन कम संख्या में किसान केंद्रों पर पहुंचे। इसके बाद से किसानों की भीड़ केंद्रों पर लगने शुरू हो गई। यह और बात है कि किसानों के सामने अब भी नम धान की समस्या आ रही है तो किसानों ने भी खरीद में देरी करने का आरोप भी लगाया है।
एक अक्तूबर से सरकारी धान क्रय केंद्रों की शुरुआत हो गई थी। शुरुआती दिनों में धान की मंडी में स्थित दो केंद्रों में आवक कम थी लेकिन इसके बाद बीते तीन दिनों से मंडी में किसानों की आवक बढ़ गई है। जिसके चलते केंद्र प्रभारियों को अब ज्यादा मजदूर लगाकर किसानों का धान तुलवाना पड़ रहा है। एक केंद्र पर प्रतिदिन तीन सौ क्विंटल खरीद निर्धारित है लेकिन इसके सापेक्ष खरीद मध्यम गति से हो रही है। उधर किसानों ने आरोप लगाया है कि उनके धान में नमी दिखाकर तौल में देरी की जा रही है। जबकि केंद्र प्रभारियों की माने तो नमी वाले धान को सुखाकर उसके बाद तौल की जा रही है, तौल लगातार जारी है।
टोकन पर्ची निकलने में आ रही दिक्कत
कई किसानों की टोकन पर्चियों में दिक्कत आ रही हैं। उनके पास टोकन पर्ची है लेकिन केंद्र प्रभारियों के पास मौजूद सूची में उनका नाम ही दर्ज नहीं है। इस पर भी किसान परेशान हैं। इस बावत गोदाम प्रभारी जसवंत सिंह ने बताया कि कंप्यूटर में जिन किसानों का पूरा ब्यौरा फीड किया जा रहा है उसमें कई लोगों के बैंक खाता नंबर फीड नहीं हो पा रहे हैं जिसके कारण ही यह दिक्कत आ रही है। इसको लेकर अधिकारियों से वार्ता के बाद ही कोई समाधान निकाला जा सकेगा।
बैठक में एसडीएम ने दिए धान खरीद सुनिश्चित करने के निर्देश
पलियाकलां। तहसील में आयोजित बैठक में एसडीएम डॉ अमरेश कुमार ने सभी धान खरीद केन्द्र प्रभारियों और क्रय एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक की। इसमें उन्होंने केन्द्र प्रभारियों को निर्देशित किया कि यदि किसान मानक के अनुसार धान लाता है तो धान खरीद सुनिश्चित करें। केंद्र प्रभारियों ने बताया कि अब तक मंडी में स्थित क्रय केंद्रों पर लगभग 900 क्विंटल धान की खरीद की गई है। शेष केंद्रों पर तत्काल क्रय निश्चित करने के निर्देश एसडीएम ने दिए हैं। साथ ही मानक के अनुसार धान होने के बाद भी क्रय न किए जाने पर संबंधित केंद्र प्रभारी पर कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है। इस दौरान एडीसीओ रामस्वरूप भी मौजूद रहे। संवाद