लखीमपुर खीरी। जिला एवं कोविड अस्पताल में तमाम कोशिशों के बावजूद ऑक्सीजन का संकट खत्म नहीं हो रहा। जबकि इन दोनों अस्पतालों से रोजाना दो से तीन गाड़ियां सिलिंडर भरवाने के लिए बाराबंकी जाती है। उधर, जिला अस्पताल में सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढ़ रही है। इससे ऑक्सीजन का संकट गहराता जा रहा है। स्थिति यह हो गई कि सिलिंडर लेकर गाड़ी के आने से पहले ही खाली सिलिंडर इकट्ठा हो जाते हैं। ऐसे में कई तीमारदारों को मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ती है।
जिला अस्पताल में रोजाना 60 से 70 मरीज भर्ती हो रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या के आगे वार्डों में बेड तक कम पड़ने लगे हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने आई वार्ड खुलवाकर मरीज भर्ती करना शुरू कर दिया। जितने मरीज भर्ती हो रहे हैं उनमें से अधिकतर को सांस लेने में दिक्क्त होती है। इससे वार्डों में बेड से लेकर ऑक्सीजन सिलिंडर का संकट गहराने लगा है। लगभग हर मरीज को ऑक्सीजन की आवश्यकता है और अस्पताल प्रशासन बाराबंकी पर निर्भर है। ऐसे में जिन मरीजों के सिलिंडर में ऑक्सीजन खत्म हो जाती है उन्हें बाहर से इंतजाम करना पड़ता है। मेडिकल वार्ड में भर्ती एक मरीज के तीमारदार सोनू एवं राजू ने बताया कि सिलिंडर में ऑक्सीजन खत्म होने हो है। वार्ड में एक भी सिलिंडर नहीं है। स्टाफ बता रहा कि बाराबंकी से गाड़ी आने पर ही सिलिंडर मिलेगा। इसलिए बाहर से व्यवस्था करना मजबूरी बन गया।
मास्क न मिलने पर नाक के पास पाइप रखकर दी ऑक्सीजन
शहर निवासी डिंपी की तबीयत बिगड़ने पर घर वाले इलाज के लिए जिला अस्पताल लाए। हालत गंभीर होने के कारण ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी। इमरजेंसी ओपीडी में ऑक्सीजन तो मिल गई, लेकिन मास्क न मिलने के कारण तीमारदार नाक के पास पाइप लगाकर ऑक्सीजन देते रहे।
वार्ड में राउंड करने के दौरा बेहोश हुए डॉ. आरएस मधौरिया
कोरोना ने जिला अस्पताल पर भी कहर बरपा रखा है। एक तरफ इससे पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है तो संक्रमित होने के कारण डॉक्टरों कम हो जाते जा रहे हैं। इस समय वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरएस मधौरिया ही मेडिकल मेल एवं फिमेल, इमरजेंसी वार्ड, आई वार्ड सहित आयुष्मान वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज कर रहे हैं। बताते हैं कुछ दिन पहले मेडिकल महिला वार्ड में राउंड करते समय अचानक डॉ. आरएस मधौरिया बेहोश होकर गिर गए। इस पर उन्हें स्टाफ रूम में लिटाया गया। करीब एक घंटे बाद होश आने पर फिर से मरीजों का इलाज करने लगे।
पिछले 24 घंटे में 12 मौतें
जिला अस्पताल में मरने वालों की संख्या कम नहीं हो रही है। इमरजेंसी में रोजाना दस से 15 लोगों की मौत हो रही है। कुछ मरीज ऐसे भी होते हैं, जिनकी मौत भर्ती होने के बाद तो कुछ की भर्ती होने से पहले ही हो जाती है। भर्ती होने से पहले मरने वालों की अस्पताल रिकार्ड तक नहीं रखता। पिछले 24 घंटे में करीब 12 लोगों की मौत हुई हैं। इसमें अधिकतर को सांस लेने में दिक्कत थी। इस पर सीएमएस का कहना है कि इस समय निजी अस्पताल सब बंद है। इस कारण मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मरने वालों में कुछ को सांस लेने में दिक्कत तो कुछ लोग दूसरी बीमारी से ग्रसित थे।
वार्ड- बेड- भर्ती मरीज- ऑक्सीजन पर
इमरजेंसी- 11- 11- नौ
मेडिकल महिला- 21-22-15
मेडिकल पुरुष-21-35-23
आई वार्ड- 15-9- 4
बुधवार को फिर गहराया ऑक्सीजन का संकट
बाराबंकी से समय पर वाहन न आ पाने पर बुधवार को जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर का संकट खड़ा हो गया। दोपहर तक अस्पताल का स्टॉक पूरी तरह खाली हो गया। इससे अस्पताल प्रशासन में अफरा तफरी मच गई। उधर, सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों की बढ़ती संख्या ने मुसीबतें और बढ़ा दी। इस पर सीएमएस ने सीएमडी स्टोर से कुछ सिलिंडर मंगवाकर मरीजों को उपलब्ध कराए। अस्पताल स्टाफ का कहना था कि यदि शाम तक गाड़ी न आई तो समस्या और विकराल हो जाएगी। सीएमएस ने बताया कि मंगलवार को छोटे बड़े कुल 37 सिलिंडर भरने के लिए फिर से भेजे हैं।
मरीजों को ऑक्सीजन के लिए परेशान न होना पड़े। इसलिए रोजाना दो से तीन गाड़ी सिलिंडर भरने के लिए भेजी जा रही हैं। कई बार जितने सिलिंडर भरने भेजे जाते हैं उसमें से आधे ही भरकर आते हैं। इससे मामला गड़बड़ा जाता है। - डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल