बांकेगंज। हैदराबाद के एक चिड़ियाघर में छह शेरों के संक्रमित मिलने के बाद पूरे भारत के चिड़ियाघरों, नेशनल पार्कों और टाइगर रिजर्व में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। दुधवा टाइगर रिजर्व में कोरोना संक्रमण को लेकर पहले ही रैपिड एक्शन टीमें गठित की जा चुकी हैं। साथ ही बाघों के बाहुल्यता वाले क्षेत्रों में वीडियो मोड कैमरों के जरिए बाघों और तेंदुओं की निगरानी की जा रही है। हालांकि दुधवा टाइगर रिजर्व में अब तक किसी भी बाघ या तेंदुए में संक्रमण के लक्षण नहीं मिले हैं।
केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, एनटीसीए ( राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ) के निर्देश पर दुधवा टाइगर रिजर्व में एक मई से पर्यटन बंद कर दिया गया था। इसके बाद दुधवा टाइगर रिजर्व में रैपिड एक्शन टीमें गठित की गईं और बाघों के बाहुल्यता वाले क्षेत्रों में वीडियो मोड कैमरे लगावाए गए ताकि कैमरे के सामने आने वाले बाघ की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया सके।
दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक संजय पाठक ने बताया कि लगाए गए वीडियो मोड कैमरों से मिलने वाली तस्वीरों के अध्ययन में यदि इन बाघों की गतिविधियां असमान्य मिलती हैं मसलन चाल में सुस्ती, नाक बहना, अधिक लार निकलना आदि तो उस बाघ को अलग करने का प्रयास किया जाएगा। ताकि उसका उपचार किया जा सके। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन एनटीसीए से जारी गाइड के अनुसार पूरी सतर्कता और सावधानी बरत रहा है।
एफडी ने बताया कि आमतौर से दुधवा टाइगर रिजर्व के बाघ और तेंदुए इंसानों के संपर्क में नहीं आते। फिर भी मानव-बाघ संघर्ष आदि के दौरान संक्रमण की आशंका रहती है। जंगल के रास्तों पर लोगों के थूकनें, छींकने और खांसने आदि से भी वन्यजीवों को संक्रमण हो सकता है। ऐसी स्थिति से बचने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जंगल में गश्त करने, वन कर्मियों को पूरे समय मास्क लगाए रखने और शरीर को सैनिटाइज करने को कहा गया है। ताकि अन्य वन्यजीवों को संक्रमण से बचाया जा सके। डीटीआर के एफडी ने बताया कि एक मई से की जा रही विशेष निगरानी में अब तक किसी भी बाघ या तेंदुए में संक्रमण जैसे कोई लक्षण नहीं मिले हैं, बावजूद इसके पूरी सतर्कता बरती जा रही है।