लखीमपुर खीरी। शहर में ऐसी कई इमारतें हैं, जिनका निर्माण सालों पहले हुआ था। ये इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि इनका प्लास्टर छूटने के साथ ही इनमें दरारें तक पड़ चुकी हैं। कुछ पर तो बड़े-बड़े पेड़ भी उग आए हैं। इनमें से किसी में सरकारी कार्यालय चल रहा है तो कहीं अस्पताल। वहीं बच्चों को भी पढ़ाया जा रहा है। ऐसे में ये भवन बारिश के दौरान कभी भी प्रशासन के साथ लोगों के लिए मुसीबत बन सकते हैं। अंग्रेजों के समय में बनी ये इमारतें देखरेख के अभाव में अत्यंत जर्जर हो चुकी हैं, लेकिन उसके बावजूद इन भवनों को उपयोग में लिया जा रहा है। किसी में सरकारी कार्यालय चल रहा है तो कहीं मरीज देखे रहे हैं। ऐसे में वहां पर रोजाना सैकड़ों लोगों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में कभी भी बरसात के दौरान ये भवन बड़े हादसे को कारण बन सकती हैं।
सालों पुराने भवन में चल रहा मालखाना
कलेक्ट्रेट परिसर की जिस बिल्डिंग में मालखाना चल रहा है। वह अंग्रेजों के समय की बनी बताई जाती है। देखरेख के अभाव में यह इमारत काफी जर्जर हो चुकी है। उस पर झाड़ियां तक उग आई हैं।
समय समय पर जिले एवं शासन से आने वाले अधिकारी मालखाने का निरीक्षण भी करते रहते हैं, लेकिन उसके बावजूद किसी को इसकी जर्जरता नहीं दिखती। जबकि यहां पर लोगों का आना जाना भी लगा रहता है।
जर्जर भवन में चल रहा मलेरिया कार्यालय
नौरंगाबाद स्थित जिस भवन में जिला मलेरिया कार्यालय चल रहा है। वह काफी जर्जर हो चुकी है। कई जगह से भवन क्षतिग्रस्त हो चुका है और इसमें दरार तक पड़ चुकी हैं। ऐसे में बारिश के दौरान पानी भी टपकने लगता है। कर्मचारी कई बार सीएमओ दफ्तर में इसे शिफ्ट करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन ध्यान न देने पर कर्मचारी बारिश के दौरान मुसीबत उठाने को मजबूर हैं।
छत पर उगे पेड़, नीचे देखे जा रहे मरीज
जिला अस्पताल में जिस भवन में मरीज देखे जा रहे हैं। वह अंग्रेजों के समय की है। देखरेख के अभाव में यह इमारते काफी जर्जर हो चुकी हैं। उस पर झाड़ियां और पेड़ तक उग आए हैं। जगह की कमी के कारण डॉक्टर इसमें ही बैठकर मरीज देखते हैं। रोजाना करीब सात सौ से आठ सौ मरीज इसी इमारत के नीचे देखे जाते हैं। बारिश के समय कभी भी यक इमारत मरीज और डॉक्टर के लिए मुसीबत बन सकती हैं।
106 साल पुराना है जीजीआईसी का भवन
एक इमारत की उम्र करीब 50 से 60 साल की होती है। जबकि जीजीआईसी में बना भवन 1913 का है, जो अत्यंत जर्जर है। हालांकि प्रधानाचार्य ने इस भवन में कक्षाएं चलाने पर रोंक लगा रखी है, लेकिन उसके बावजूद बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन कार्य में परीक्षक वहां बैठ कर कॉपियां जांचते हैं। तो वहीं भोजनावकाश के समय छात्राएं भी लंच करने लगती हैं। ऐसी स्थिति में कभी भी ये इमारत हादसे का कारण बन सकती हैं।
शहर में जो जर्जर भवन हैं, उनमें सरकारी कार्यालय, अस्पताल एवं स्कूल चल रहे हैं। जिनकी देखरेख की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की है। इन भवनों के बारे में डीएम साहब को अवगत कराके निराकरण कराया जाएगा।
आरआर अंबेश, ईओ-नगर पालिका परिषद-लखीमपुर