स्वाइन फ्लू एवं डेंगू वार्ड बंद मिलने पर जताई नाराजगी
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के अभाव में हुई मौतों के बाद जागे स्वास्थ्य विभाग की दो सदस्यीय टीम ने सोमवार को जिला अस्पताल पहुंचकर ऑक्सीजन की उपलब्धता की पड़ताल की। जेडी ने वार्डों सहित आईसीयू एवं महिला अस्पताल की नवजात शिशु केयर यूनिट को देखा और वहां मौजूद सिलेंडरों को चेक करके उनमें ऑक्सीजन की उपलब्धता देखी।
जेडी हेल्थ अवधेश कुमार यादव एवं क्वालिटी एन्श्योरेंस के मंडलीय सलाहार डॉ. अरविंद कुमार सोमवार की दोपहर करीब एक बजे जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने करीब एक घंटे तक आईसीयू वार्ड का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने वार्ड के टेक्नीशियन मासूम अली खान से मशीनों को चलवाकर देखा। इस दौरान वार्ड में मौजूद छह नंबर के वेंटीलेटर में तकनीकी दिक्क्त मिली। वार्ड की मशीनों आदि के संचालन के बारे में टेक्नीशियन के जवाब से जेडी असंतुष्ट दिखे। वार्ड के पीछे स्थित ऑक्सीजन प्लांट की भी स्थित देखी और वहां पर कितने सिलेंडर मौजूद हैं, उनमें ऑक्सीजन है कि नहीं, ऑक्सीजन कहां से भराई जाती है आदि की पड़ताल की। दस दौरान टेक्नीशियनों को 13 हजार के बजाय मानदेय के रूप में मिल रहे चार हजार रुपयों के बारे में भी मालूमात कर शासन को रिपोर्ट करने को कहा। इस दौरान सीएमएस डॉ. अरुण कुमार गौतम, एसीएमओ डॉ. वीबी राम, डॉ.आरके वर्मा, डॉ.राजेश कुमार, रमाकांत पांडे, मेट्रन सहित आईसीयू वार्ड स्टाफ सहित जिला अस्पताल का स्टाफ मौजूद रहा।
टेक्नीशियन स्टाफ से कहा कि दुबारा करके आओ ट्रेनिंग
-आईसीयू वार्ड के निरीक्षण के दौरान जेडी ने टेक्नीशियन स्टाफ से वेंटिलेटर चलवाने के साथ मरीजों को कितनी मात्रा में ऑक्सीजन सप्लाई करनी है इसके बारे में विस्तृत पूछताछ की। टेक्नीशियन द्वारा मशीन के बारे में विस्तृत जानकारी ना देने पर उन्होंने स्वयं उन्हें चलाकर देेखा। इस दौरान वह वार्ड की व्यवस्था से संतुष्ट दिखे, लेकिन टेक्नीशियनों से दुबारा ट्रेनिंग करके आने को कहा।
बंद मिला स्वाइन फ्लू और डेंगू वार्ड
- जेडी को स्वाइन फ्लू और डेंगू वार्ड दिखाने के लिए कॉर्डियोलॉजी लेकर पहुंचे सीएमएस को वहां पर ताला लगा मिला। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई। वहीं मेट्रन ने कहा कि वार्ड ब्वाय से कहा था कि साहब आ रहे हैं, लेकिन फिर भी दो बजे ताला लगाकर चला गया। जिस पर जेडी ने पूछा कि दो बजे के बाद कोई मरीज आए तो उसे कहां भर्ती करोगे। ताला खुलने के बाद स्वाइन फ्लू एवं डेंगू वार्ड में गंदगी देखकर नाराजगी जताई। उन्होंने दवा आदि की उपलब्धता की जानकारी लेकर डॉक्टरों को स्वाइन फ्लू और डेंगू का इलाज करने का तरीका बताया और ऐसे मरीजों को लखनऊ भेजने के बजाय अस्पताल में इलाज करने को कहा।