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आंगन में फिर लौटेगी प्यारी गौरैया

Wed, 02 Mar 2016 07:17 PM IST
धौरहरा।
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चूं-चूं करती गौरैया फिर आंगन में लौटेंगी। वनविभाग ने गौरैयों के आवास और प्रजनन के लिए घोंसले बनवाकर बच्चों में वितरण शुरू किया है। 20 मार्च को मनाए जाने वाले विश्व गौरैया दिवस से पहले विभाग को इस कवायद का रिजल्ट भी देना है। बुधवार को इसके लिए वन अधिकारियों ने नगर क्षेत्र के स्कूलों में जाकर बच्चों को गौरैया के बारे में बताया और घोंसले लगाए।
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बुधवार को वन क्षेत्राधिकारी यूपी सिंह ने नगर क्षेत्र के प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में बच्चों की क्लास लगाई। उन्हें रेंजर ने गौरैया के विषय में जानकारी देकर उसके संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया। बा स्कूल की वार्डेन गरिमा सिंह और सहायक शिक्षिकाओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। बॉ स्कूल सहित जूनियर और प्राथमिक स्कूलों के भवन में रेंजर ने गौरैया बाक्स भी लगवाए।
इस कार्यक्रम में शिक्षक संघ अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव, योगेंद्र मिश्र, शिक्षिका मनीषा और एकता व्यास के सहयोग से बच्चों को गौरैया के महत्व और पर्यावरण में उसकी भूमिका पर विस्तृत जानकारी देने के बाद इस स्कूल में घोंसले लगाए गए। बेलरायां। उत्तर निघासन रेंज बेलरायां के तत्वावधान में सरजू सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में गौरैया संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वन क्षेत्राधिकारी एमएन सिंह ने विद्यार्थियों को लकड़ी के घोंसले देकर गौरैया संरक्षण की जानकारी दी।
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इस मौके पर रेंजर एमएन सिंह ने कहा कि शहरीकरण के चलते आधुनिक घरों में गौरैया को घोंसला बनाना दूभर हो गया है। गांवों, शहरों में मोबाइल टॉवरों का जाल फैल रहा है। मोबाइल टॉवरों की इलेक्ट्रो मैगनेटिक किरणें गौरैया में प्रजनन क्षमता कम कर रही हैं। गौरैया की कमी होने से पर्यावरण के सामने खतरा पैदा हो गया है। गौरैया संरक्षण के लिए घरों, बाग बगीचों में बने घोंसलों की देखभाल करें। गौरैया के प्रजनन के समय अंडों की सुरक्षा, दाना पानी की व्यवस्था करें। कार्यक्रम का संचालन वनविभाग के लिपिक किशन कश्यप ने किया।
इस मौके पर उत्तर निघासन रेंज बेलरायां के रेंजर एमएन सिंह, कॉलेज के प्रधानाचार्य जनार्दन प्रसाद त्रिपाठी, रमाकांत अवस्थी, रवींद्र कुमार यादव, बांकेलाल, मुशीर खां, सतीश कुमार मिश्रा, आनंद कुमार शुक्ला, कौशल सिंह के अलावा शिक्षक मौजूद रहे। 
पलियाकलां। गौरैया संरक्षण के प्रति बच्चों को जागरूक करने के लिए गुरुकुल एकेडमी स्कूल में वन विभाग ने एक कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें वन विभाग के अधिकारियों ने बच्चों को गौरेया के महत्व को बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया। बच्चों ने जागरूकता रैली भी निकाली और वन विभाग ने बच्चों को घोंसलों का वितरण किया।

गुरुकुल एकेडमी स्कूल में वन विभाग नार्थ खीरी के पलिया वनाधिकारी आरके दीक्षित ने बताया कि अधिक तर दिखने वाली छोटी सी गौरैया की संख्या अब कम होती जा रही है। प्राकृतिक संतुलन में हर जीव का अपना अलग महत्व है। उन्होंने बताया कि भौतिकवादी युग में नई तकनीकों का विकास हुआ है पर पशु पक्षियों को कहीं न कहीं परोक्ष रूप से नुकसान भी पहुंच रहा है।
वन दरोगा विजेंद्र सिंह, सुरेंद्र कुमार, उपेंद्र नाथ शुक्ला, शरद कुमार मिश्रा आदि ने भी बच्चों को संबोधित किया और  बताया कि गौरैया संरक्षण दिवस 20 मार्च को मनाया जाता है। अतिथि अनूप गुप्ता ने कहा कि हमें मोबाइल फोन का प्रयोग कम से कम करना चाहिए ताकि इस तकनीक से पैदा होने वाली तरंगें पक्षियों को नुकसान न पहुंचा सकें। प्रबंधक मुकेश अग्रवाल और चेयरमैन वीरेंद्र शुक्ला ने पक्षियों के संरक्षण में चलाए जाने वाले जागरूकता अभियानों को कारगर बताया। प्रधानाचार्य एचपी बड़ोनी ने सभी के प्रति आभार जताया।
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