लखीमपुर खीरी। बाढ़ की मार झेल रहे जिले के छह लाख से अधिक किसानों में से मात्र 5600 ने ही खरीफ सीजन की फसलों का बीमा कराया है। पलिया, निघासन, बिजुआ और धौरहरा के किसानों की कई हजार एकड़ फसल बाढ़ के पानी में डूबकर बर्बाद हुई। इन फसलों में धान, मक्का, उड़द और मूंगफली शामिल है। हालांकि गन्ने को छोड़कर खरीफ सीजन की यह चारों फसलें बीमा क्लेम में हैं। इसके बावजूद किसानों ने बीमा कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
जनपद में गन्ना किसानों की संख्या सबसे अधिक है। जिले में करीब दो लाख हेक्टेयर भूमि पर धान, मक्का, उड़द और मूंगफली पैदा की जाती है। इनमें धान का रकबा 1.82 लाख हेक्टेयर है। जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश और बैराज से छोड़े गए पानी से आई बाढ़ में किसानों की हजारों में एकड़ फसल बर्बाद हुई। अकेले पलिया क्षेत्र में 12 से 14 सौ एकड़ फसल को नुकसान पहुंचा। संपूर्णानगर, बिजुआ, धौरहरा व निघासन क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों के किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। आपदा के बावजूद जिले में फसल बीमा का लाभ लेने वाले किसानों की संख्या काफी कम है। देखा जाए तो खरीफ सीजन की बीमा क्लेम फसलों की खेती भी ढाई से तीन लाख किसान करते हैं। फिर भी बीमा कराने में मात्र 5600 किसानों ने ही दिलचस्पी दिखाई।
किस फसल का है कितने हेक्टेयर रकबा
धान - 1.82 लाख हेक्टेयर
मक्का- 10 हजार हेक्टेयर
उड़द- पांच हजार हेक्टेयर
मूंगफली - तीन से चार हजार हेक्टेयर
टीम तैयार, सर्वे अब तक शुरू नहीं
कृषि और राजस्व विभाग अब तक बाढ़ से हुए फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू नहीं करा सका है। अधिकांश स्थानों पर खेतों से पानी उतर गया है। जिला कृषि अधिकारी अरविंद चौधरी ने बताया कि टीमें बनाई जा चुकी हैं। एक-दो दिन में सर्वे शुरू करा दिया जाएगा।
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31 जुलाई तक करा सकते हैं फसल बीमा
जिला कृषि अधिकारी अरविंद चौधरी ने बताया कि किसान 31 जुलाई तक फसल बीमा करा सकते हैं। बाढ़ से बर्बाद हुई इस सीजन की फसलों का बीमा क्लेम अब मिल जाएगा। बीमा क्लेम सामूहिक और व्यक्तिगत दो तरीकों से मिलता है। धान की फसल कटने के बाद उपज के मूल्यांकन से भी बीमा क्लेम मिलता है। कृषि अधिकारी ने अधिक से अधिक किसानों से फसल बीमा योजना का लाभ लेने की अपील की है।