- सैकड़ों थारू महिलाओं और पुरुषों ने लिया हिस्सा
- सावित्री बाई फूले के परिनिर्वाण दिवस पर कार्यक्रम
सावित्री बाई फूले परिनिर्वाण दिवस के तहत अखिल भारतीय वनजन श्रमजीवी यूनियन और उसके संगठनों के बैनर तले आदिवासी थारू महिला पुरुषों ने रैली निकाली। इन्होंने तहसील पहुंचकर डीएम को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को दिया। इसमें कई मांगे शामिल हैं।
रैली की शुरुआत दुधवा रोड की एक धर्मशाला से हुई और यहां से बाईपास मार्ग होती हुई चौकी से तहसील पहुंची। रैली में आदिवासी थारू महिलाओं और बालिकाओं ने नृत्य भी किया और तहसील पहुंचकर डीएम को संबोधि ज्ञापन तहसीलदार को दिया। ज्ञापन में कहा गया कि वनाश्रित समुदायों की लंबे समय से उपेक्षा की जा रही है। 15 दिसंबर 2006 को वनाधिकार कानून एक विशिष्ट कानून के रूप में पास किया गया था, लेकिन संसद द्वारा यह बात स्वीकार कर लेने के बाद भी आज तक वनाश्रित समुदायों के साथ अन्याय बंद नहीं किया गया। वन विभाग को इस कानून को लागू करने में सिर्फ एक सहयोगी की भूमिका अदा करने के निर्देश हैं। आरोप है कि वनाधिकार कानून लागू होने के बाद से वन विभाग द्वारा कानून के विरोध में कदम उठाए जा रहे हैं और तानाशाही कर समुदाय के लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। उन पर लकड़ी काटने, जंगली जानवरों की तस्करी आदि के झूठे मुकदमे भी दर्ज किए जा रहे हैं। ज्ञापन में मांग की गई है कि दुधवा क्षेत्र के करीब 25 गांवों के दावों का निस्तारण जल्द हो, ग्राम सभा की खुली बैठक का आयोजन कर नई समितियों का गठन, दुधवा में हुए तमाम फर्जी मुठभेड़ों की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी वन विभाग और पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाने, नबादा राणा पर वार्डन ईश्वर दयाल और एसओ गौरीफंटा द्वारा किए गए हमले मामले में कार्रवाई कराई जाए। इसमें अखिल भारतीय वन श्रमजीवी महासचिव रोमा, रजनीश, बग्गो देवी, रामगीता, अनारकली, मालती, मुन्नी, राजकुमारी, नबादा, फूलती, रविता, लालमती, राजमती, शोभा आदि सैकड़ों थारू महिलाएं और पुरुष शामिल रहे।