मछली उत्पादन को करारा झटका, मत्स्य पालक मायूस
कडी धूप और भीषण गर्मी के चलते ताल-तालाब सूखने लगा है। इससे मछलियों के लिए खतरा पैदा हो गया है। गर्मी के कहर से लगातार मछलियों के मरने से मछली पालकों के माथे पर चिंता की लकीरें झलकने लगी हैं।
भीषण गर्मी के चलते बांकेगंज इलाके के अधिकांश तालाबों में पानी बहुत कम रह गया है। इससे जलीय पौधे सूख गए है। जलीय पौधों के सूखने से मछलियों को पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिल पा रही है। दूसरी तरफ तेज धूप से तालाब की तली तक पानी गर्म हो रहा है। इससे भी मछलियां मर रही है। मछली पालको रमेश कुमार, नन्हें, छोटे, रवी, अरुण, गुड्डू ने बताया कि मछली पालन उनका मुख्य व्यवसाय है। कहा कि ग्राम पंचायत के तालाबों में मछली पालन के लिए तहसील से पट्टे पर तालाब लिए थे। इन तालाबों में कर्ज लेकर मछली पालन का रोजगार करते है। उससे होने वाली आमदानी से वह पूरे साल घर-परिवार का खर्च चलाने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई कराते हैं। गर्मियां शुरू होते ही इन तालाबों में पानी सूखने से मछलियां मरने लगती है। जिससे उन्हें हर साल काफी नुकसान उठाना पड़ता है। पानी भरने का कोई इंतजाम न होने से तालाब की तली तक पानी गर्म हो जाता है। पानी गर्म होने पर मछलियों के मरने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इससे उनके रोजी-रोजगार पर संकट मंडराने लगा है। मत्स्य पालकों ने क्षेत्र पंचायत से सूख रहे तालाबों में बोरिंग और ट्यूबवेल के जरिए पानी भरवाने की मांग की है।