तिकुनिया। ग्राम पंचायत बरसोला कला में न्यायालय के आदेश पर अवैध कब्जा हटवाने पहुंचे तहसील प्रशासन ने कई घरों को बुलडोजर से ढहा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने सामान हटाने तक का मौका नहीं दिया। कार्रवाई के दौरान अफरातफरी का माहौल रहा।
ग्राम पंचायत बरसोला कला निवासी मोहर्रम अली ने उच्च न्यायालय में अपनी जमीन को ग्रामीणों से मुक्त करने को लेकर वाद दायर किया था। इसका मुकदमा करीब 20 साल से चल रहा था। इस बीच उच्च न्यायालय ने मोहर्रम अली के पक्ष में फैसला कर दिया। इसके आधार पर पुलिस बल के साथ मजिस्ट्रेट करीब छह बार मौके पर पहुंचे, लेकिन कोई न कोई अड़चन के चलते वादी को कब्जा नहीं मिल सका।
मंगलवार पूर्वाह्न करीब 11:00 बजे सातवीं बार प्रशासन, पुलिस बल के साथ गांव पहुंचा और जमीन खाली कराई। इस दौरान अपना आशियाना गिरते हुए देख ग्रामीणों में चीख पुकार मच गई। ग्रामीणों में वादी मोहर्रम अली के प्रति भारी गुस्सा रोष देखने को मिला। इस दौरान एसडीएम राजीव निगम, अमीन कमिश्नर वीरेंद्र कुमार, पवन कुमार अग्रवाल, मिट्ठू राम राणा, विवेक राजवंशी, कोतवाली इंस्पेक्टर अमित सिंह भदौरिया सहित बड़ी संख्या में पुलिस के जवान मौजूद रहे।
इनके गिराए गए घर
उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रशासन ने गांव निवासी सगीर अहमद, इब्राहिम कुरैशी, शब्बीर, मुख्तार, मुस्ताक, मुमताज, इश्तियाक शाहिद कारी सहित 25 लोगों के कच्चे घरों के छप्पर और दीवार गिरा दी।
ग्रामीण बोले-हमने नहीं किया कब्जा
ग्राम निवासी सागर, इब्राहिम, शब्बीर व मुस्ताक ने बताया वादी मोहर्रम अली के पिता अब्दुल करीम को करीब 40 साल पहले नकद रुपये देकर उन लोगों ने जमीन खरीदी थी। कागज पर लिखा पढ़ी हुई थी। हमने कोई कब्जा नहीं किया है।
प्रधान पति ने कहा-नहीं दी पूर्व सूचना
ग्राम पंचायत के प्रधान पति मोहम्मद मियां ने कहा कि वादी मोहर्रम अली की 90 डिसमिल जमीन गांव में है। उसे उनके पिता ने बिक्री किया था। कब्जा छह बीघे पर है। ग्रामीणों को घर से सामान निकालने की कोई सूचना नहीं दी गई। अचानक कार्रवाई शुरू कर दी गई। इसके कारण लोगों का नुकसान हुआ है।
कार्रवाई के दौरान इंस्पेक्टर अमित सिंह भदौरिया, पुलिस बल और ग्रामीण। संवाद