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कूड़े, कचरे और अतिक्रमण के कारण दम तोड़ रही उल्ल नदी

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उल्ल नदी।
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जहरीला हो चुका है पानी, शहर के पास गंदे नाले में तब्दील हुई नदी
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खीरी जिले में सदानीरा उल्ल नदी की लंबाई करीब 95 किलोमीटर
लखीमपुर खीरी। कभी लखीमपुर शहर की लाइफ लाइन कही जाने वाली उल्ल नदी अब कूड़े-कचरे और अतिक्रमण के बोझ तले दम तोड़ रही है। सदानीरा उल्ल नदी का पानी गर्मी केे मौसम में इतना कम हो गया है कि यह नदी गंदे नाले में तब्दील हो गई है। नदी में पानी की जगह कूड़ा कचरा ही नजर आ रहा है।
उल्ल नदी पीलीभीत से निकलकर पीलीभीत टाइगर रिजर्व की हरीपुर रेंज से दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी, भीरा रेंज, मैलानी रेंज से निकलकर गोला, अलीगंज फरधान होते हुए देवकली पुल के पास लखीमपुर की ओर मुड़ जाती है। लखीमपुर में शहर से सटकर बहती हुई यह नदी सीतापुर जिले में रामपुर मथुरा के पास शारदा नदी में जाकर मिल जाती है। खीरी जिले में उल्ल नदी की लंबाई करीब 95 किलोमीटर है। शहर में उल्ल नदी के किनारे सेठ घाट और मुक्तिधाम स्थित है। जहां धार्मिक आयोजन और कर्मकांड भी होते हैं।
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लखीमपुर और महेवागंज के बीच बहने वाली उल्ल नदी में महेवागंज पुल के पास धोबी घाट है, जहां गंदे कपड़े धोने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों से नदी का पानी जहरीला हो गया है। कुछ उद्योगों से निकलने वाला औद्योगिक कचरा भी इसी नदी में डाला जा रहा है। पानी जहरीला होने से नदी की मछलियां और जलजीव खत्म हो गए हैं। इससे नदी की जैव विविधता पर भी असर पड़ा है। कुछ साल पहले तक नगर पालिका ने उल्ल नदी के किनारे को डलावघर बना रखा था। अब यहां कूड़ा पड़ना तो बंद हो गया है फिर भी नदी में इतना कचरा और जलकुंभी जमा है कि नदी गंदे नाले जैसी ही नजर आती है।
जंगल में वन्यजीवों की प्यास बुझाती है यह नदी
उल्ल नदी पीलीभीत से निकलने के बाद काफी दूर तक जंगल का सफर तय करती है। सदानीरा होने के कारण किशनुपर सेंक्चुरी और दुधवा टाइगर रिजर्व के भीरा और मैलानी रेंज में वन्यजीवों की प्यास बुझाती है। जंगल में नदी की हालत काफी हद तक ठीक है। जंगल में उल्ल नदी के पानी का बहाव भी ठीक है, लेकिन जंगल से बाहर निकलते ही नदी की दुर्दशा शुरू हो जाती है। कहीं अतिक्रमण तो कहीं कचरे के कारण नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ता जा रहा है। फरधान में अंबूपुर बहेरवा के पास भी उल्ल नदी काफी हद तक साफ है।
डीएम के प्रयास से बहुरेंगे नदी के दिन, होगा पुनरुद्धार
अब डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने उल्ल नदी के पुनरुद्घार का बीड़ा उठाया है। यदि उनका प्रयास सफल हुआ तो उल्ल नदी जल्द दी अविरल और निर्मल बहती नजर आएगी। डीएम का कहना है कि उन्होंने अभी हाल ही में अफसरों के साथ बैठक कर नदी की साफ-सफाई की कार्ययोजना बनाई है। इसके तहत नदी के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर फलदार, छायादार और औषधीय पौधे लगाकर पर्यटन की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। प्रथम चरण में सीडीओ अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में उल्ल नदी जिन ग्राम पंचायतों के किनारे से होकर गुजरी है, वहां मनरेगा के जरिए नदी की साफ-सफाई का भी काम युद्ध स्तर शुरू कराया जाएगा।
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उल्ल नदी को पुर्नजीवन देने के लिए एक कार्ययोजना बनाई गई है, जिस पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। नदी की जलकुंभी और सिल्ट सफाई कराने के साथ दोनों किनारों पर पौधरोपण किया जाएगा। - महेंद्र बहादुर सिंह, डीएम खीरी
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