हाल ही में डीएम के औचक निरीक्षण में नगर पालिका के निर्माण कार्यों में तमाम खामियां मिलने और ठेकेदारों की मनमानी उजागर हुई, इस मनमानी की एक वजह यह भी है कि नगर पालिका में निर्माण कार्यों की न तो निगरानी हो रही है और न ही घटिया निर्माण पर ठेकेदारों को कोई टोकने वाला है। नगर पालिका लखीमपुर अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रही है। ईओ से लेकर जलकल अभियंता और सफाई निरीक्षक समेत कई अधिकारियों के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। पालिका दफ्तर में भी हालात ठीक नहीं है। वहां भी एक-एक बाबू कई-कई अनुभागों का कार्य देख रहा है। इस बाबत कई बार शासन को पत्र भेजा गया, लेकिन किसी अधिकारी-कर्मचारी की तैनाती नहीं हुई।
मौजूदा हालात पर नजर डालें तो अधिशाषी अधिकारी मृत्युजंय यादव के तबादले के छह माह गुजरने के बाद भी नए अधिशाषी अधिकारी की पोस्टिंग नहीं हुई। एसडीएम सदर ईओं का चार्ज संभाल रहे हैं। सफाई निरीक्षक के दो पदों के मुकाबले पिछले चार साल से कोई नहीं आया। जलकल अभियंता का पद पिछले तीन साल से खाली पड़ा है। शायद यही वजह है कि मॉनीटरिंग न होने के कारण शहर की पेयजल व्यवस्था चरमराई हुई है। ठेकेदारों के निर्माण कार्यों की निगरानी करने के लिए नगर पालिका में अवर अभियंताओं के दो पद हैं, लेकिन पिछले पांच सालों से एक ही अभियंता तैनात है। राजस्व निरीक्षक का पद पिछले 10 वर्षों से खाली पड़ा है। जिसके कारण राजस्व की वसूली लगभग न के बराबर हो रही है। वहीं एकाउंटेंट का पद भी 10 वर्षों से खाली पड़ा है। नए एकाउंटेंट के न आने की वजह से बाबू को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पथ-प्रकाश इंस्पेक्टर पिछले पांच वर्षों से नगर पालिका को नहीं मिला है। वहीं पालिका दफ्तर में बाबुओं की नई तैनाती न होने और कई के रिटायर होने के कारण व्यवस्था बदहाल हो गई है। जिसका खामियाजा नगरीय क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
अधिकारियों की कमी को लेकर कई बार शासन को पत्र भेजकर अवगत कराया जा चुका है। रिमाइंडर भी भेजे गए, लेकिन ईओ या किसी अन्य अधिकारी की तैनाती नहीं हो रही है।
-डॉ. इरा श्रीवास्तव, अध्यक्ष नगर पालिका