मैलानी। दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के मैलानी रेंज के जंगल के पास स्थित छेदीपुर गांव में एक ही परिवार के तीन लोगों पर हमला कर घायल करने वाली बाघिन अब कैमरों को भी चकमा दे रही है। बाघिन की रविवार को कोई लोकेशन नहीं मिली। पवनकली हथिनी के साथ वनकर्मियों ने रविवार सुबह फिर कांबिंग की, लेकिन बाघिन की कहीं कोई गतिविधि नहीं मिली।
21 जून को बाघिन ने छेेदीपुर निवासी रामनिवास सहित तीन परिवारवालों पर खेत में हमला कर घायल कर दिया था। अगले दिन से ही दुधवा की प्रशिक्षित हथिनी पवनकली के संग वनकर्मी बाघिन की तलाश में कांबिंग कर रहे हैं। वनकर्मियों और डब्ल्यूटीआई की टीम ने बाघिन को ट्रेस करने के लिए जंगल में कुल छह जगहों पर कैमरे लगाए हैं और दिन-रात पेट्रोलिंग कर रहे हैं। बुधवार को बनवारी और निरंजन के खेत में बाघिन के पगमार्क मिले थे। वनकर्मियों का अनुमान है कि शिकार का पीछा करते हुए बाघिन खेतों तक आई और खेतों से ही जंगल लौट गई। शुक्रवार को कैमरा स्टडी में बाघिन की तस्वीर कैद हुई थी। तब से अब तक बाघिन की कोई गतिविधि नहीं मिली है तो कैमरों में भी फोटो कैद नहीं हुई है। ट्रेनी आईएफएस मैलानी रेंजर राजेश कुमार ने बताया कि वनकर्मी पेट्रोलिंग कर बाघिन की तलाश कर रहे हैं। प्रशिक्षित हथिनी पवनकली संग रविवार को भी संभावित जगहों पर कांबिंग की गई, लेकिन कहीं भी कोई निशान नहीं मिले। बाघिन की निगरानी को रात में भी टीमें पेट्रोलिंग में लगाई गई हैं। वन विभाग की मुख्य कोशिश यही है कि बाघिन जंगल से खेतों की तरफ न आए।
फील्ड पेट्रोलिंग और कैमरा ट्रैप डाटा में बाघिन के मूवमेंट के कोई साइन नहीं मिले हैं। अभी प्रशिक्षित हथिनी पवनकली के साथ कांबिंग जारी रहेगी। छेदीपुर में वनकर्मियों की टीमें बाघिन की लगातार निगरानी में लगी हैं। रात को भी पेट्रोलिंग कराई जा रही है।
-राजेश कुमार, ट्रेनी आईएफएस, मैलानी रेंजर
बाघ की दहशत, रेंजर पहुंचे सुंदरपुर गांव
ममरी। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर शनिवार सुबह वनकर्मियों के साथ मोहम्मदी रेंज क्षेत्र के सुंदरपुर गांव पहुंचे रेंजर मोबीन आरिफ ने सात जून से दहशत का पर्याय बने बाघ के बारे में प्रधान प्रतिनिधि रामकुमार वर्मा और ग्रामीणों से जानकारी हासिल की। बाघ की गन्ने के खेतों में लोकेशन ट्रेस की।
सुंदरपुर गांव में बाघ की चहलकदमी को वन विभाग के अधिकारी झुठला रहे थे लेकिन ग्रामीणों की दहशत को लेकर अमर उजाला ने खबर प्राथमिकता से छापी थी। इसे अधिकारियों ने गंभीरता से लिया और रेंजर को सख्त निर्देश दिए। गांव वालों ने रेंजर और एसटीपीएफ जवानों को वह स्थान भी दिखाया जहां बाघ ने सात जून को सुशील पर हमला किया था। ग्रामीण वनकर्मियों को उस स्थान पर भी ले गए जहां शुक्रवार सुबह बाघ ट्रैक्टर के सामने आया था। तब कहीं जाकर रेंजर ने माना कि बाघ की चहलकदमी खेतों में है। रेंजर का कहना है कि कई किसानों के ट्यूबवेल आसपास लाइन से बने हैं, हो सकता है कि बाघ पानी पीने या शिकार की तलाश में वहां पहुंच गया हो, उन्होंने गांव वालों को खेतों में अकेले न जाने, सतर्क रहने की सलाह दी।