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अब तो खेतों को खाने लगी सुहेली

Tue, 24 May 2016 11:29 PM IST
महबूब आलम/ पलियाकला
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सुहेली - फोटो : अमर उजाला
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अब तो खेतों को खाने लगी सुहेली
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सिल्ट साफ न होने से पुराना प्रवाह क्षेत्र छोड़ नाले में जा मिली, बाढ़ के मुहाने पर है पलिया
कागजों में हो गई सिल्ट सफाई, नकउवा में मिल गई
कई एकड़ खेत रेत से पटे, वन्यजीवों को पानी का संकट
सरकारी कागजों में सुहेली की सिल्ट साफ हो गई लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। कभी दुधवा की लाइफ लाइन और पलिया का वरदान कही जाने वाली सुहेली नदी लोगों के लिए अभिशाप बनने की ओर है। सुहेली राह भटक सकती है यह जानकर सरकार ने दस साल पहले सवा तीन करोड़ रुपये सिल्ट की सफाई के लिए जारी किए थे। सिल्य हटी नहीं और रेत के टीलों ने सुहेली का रुख मोड़ दिया है।
अब मूल प्रवाह छोड़कर सुहेली नकउवा नाले में मिलने के बाद कस्बे की ओर बढ़ चली है। इससे कई एकड़ खेत रेत से पटकर बंजर हो गए हैं। पूरा पलिया बाढ़ के मुहाने पर खड़ा है और वन्य जीवों को पानी नहीं मिलने के कारण वे कस्बे की तरफ आ रहे हैं।
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नेपाल से संपूर्णानगर, सठियाना रेंज होते हुए निघासन रेंज में दुधवा नेशनल पार्क के किनारे बहते हुए सुहेली बैराज में शारदा से मिल जाती है। नेपाल से आने वाले डोडा नाले से बारिश के दौरान आने वाली बाढ़ को रोकने के लिए डोडा को काटकर सुहेली में मिला दिया गया था। अब हालात बदल गए हैं। अब सुहेली ही बाढ़ का खतरा लेकर आ रही है। पलिया दुधवा मार्ग पर बने पुल से पांच किलोमीटर पहले नदी की मुख्य धारा में काफी सिल्ट होने से प्रवाह स्थल ऊंचा हो गया है। सुहेली नकउवा नाले में मिलकर पलिया कस्बे से सटकर बहने लगी है। यहां के दर्जनों गांव के किनारे-किनारे होते सुहेली परबतिया घाट के पास अपने मूल प्रवाह स्थल पर उतरकर सुहेली बैराज में जाकर शारदा से मिल रही है। इसबीच पलिया पुल से परबतिया घाट का दस किलोमीटर का मूल प्रवाह स्थल पूरी तरह सूख चुका है। यहां बारिश में भी पानी नहीं आता।
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पिछली बारिश के दौरान सुहेली और नकउवा का पानी दर्जनों गांवों के खेतों तक पहुंचा और रेत के ढेर छोड़ आया। इससे हजारों एकड़ खेत बंजर में तब्दील हो गए और किसानों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण बताते हैं कि सुहेली के रुख में परिवर्तन पिछले पांच साल से होना शुरू हुआ। दो साल पहले तक मूल प्रवाह स्थल से आधा पानी गुजर जाने के कारण समस्या नहीं हुई। फिर भी जिम्मेदार खामोश रहे और अब नदी के मूल प्रवाह स्थल पर पानी बिल्कुल नहीं जाता है।
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