संवाद न्यूज एजेंसी
मैलानी (खीरी)। पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) में सुनियोजित प्रयासों से ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता को ध्यान रखते हुए अब हेड ऑन जेनरेशन (एचओजी) तकनीक से ट्रेन के कोचों में बिजली की आपूर्ति की जा रही है। गोरखपुर-पीलीभीत खंड पर संचालित गोरखपुर एक्सप्रेस सहित 128 ट्रेनों में यह व्यवस्था शुरू हो गई है। इससे डीजल की बचत के साथ ही डीजल खपत से उत्पन्न कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है। रेलवे को मई तक दो करोड़ 81 लाख की बचत भी हुई है।
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान में पूर्वोत्तर रेलवे में 128 ट्रेनों का संचालन एचओजी तकनीक से किया जा रहा है। इसमें गोरखपुर-पीलीभीत खंड पर चलने वाली गोरखपुर-पीलीभीत एक्सप्रेस भी शामिल है। हेड ऑन जेनरेशन तकनीक के प्रयोग से वित्तीय वर्ष 2025-26 में मई तक 311 किलोलीटर हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) और राजस्व के रूप में दो करोड़ 81 लाख की बचत हुई है।
यह एक तकनीकी प्रगति है, जो ईंधन लागत और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में प्रभावी साबित हुई है। इस तकनीक के उपयोग से पहले ट्रेन में दो पॉवर कार लगाए जाते थे। अब दो पॉवर कारों के बजाए सिर्फ एक आपातकालीन पॉवर कार लगाई जाने लगी है। ताकि हेड ऑन जेनरेशन तकनीक में खराबी आने पर पॉवर कार के जनरेटर से ट्रेन को बिजली आपूर्ति की जा सके।
हटाए गए पॉवर कार के स्थान पर एक एलएसएलआरडी कोच लगाया जाने लगा है। इसमें 31 यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है। अतिरिक्त लगेज स्पेस भी होता है। इसका लाभ यात्रियों को भी मिलता है।
हेड ऑन जेनरेशन एक विद्युत आपूर्ति प्रणाली है, जो विद्युत आपूर्ति तंत्र के रूप में कार्य करती है। ट्रेन में प्रकाश, एयर कंडीशनिंग, पंखे, पेंट्री संचालन और अन्य विद्युत आवश्यकताओं के लिए विद्युत आपूर्ति रेलगाड़ी के इंजन से ली जाती है, जो पूरी ट्रेन की विद्युत जरूरतों को पूरा करती है। इसके विकसित होने से ट्रेनों के पॉवर कारों में लगाए जाने वाले डीजल जनरेटर के चलाने की आवश्यकता नहीं रहती है।
डब्ल्यूएपी-5 और डब्ल्यू एपी-7 में है एचओजी प्रणाली
रेलवे के डब्ल्यूएपी-5 और डब्ल्यूएपी-7 श्रेणी के लोकोमोटिव (इंजन) में हेड ऑन जेनरेशन प्रणाली है। इस श्रेणी के इंजनों से ट्रेन के कोचों को बिजली आपूर्ति की जाती है।
एलएचबी कोच एचओजी तकनीक से लैस
रेलवे ने एलएचबी कोच के रेक को हेड ऑन जेनरेशन प्रणाली से लैस किया है। इस प्रकार हेड ऑन जेनरेशन प्रणाली के लिए डब्ल्यूएपी-5, डब्लयूएपी-7 लोकोमोटिव और एलएचबी कोच जरूरी हैं।
क्या है हेड ऑन जेनरेशन तकनीक
सीनियर सेक्शन इंजीनियर रेलवे मैलानी सूरज कुमार ने बताया कि हेड ऑन जेनरेशन तकनीक ट्रेनों में नई कुशल बिजली आपूर्ति प्रणाली है, जो इलेक्टि्रक लोकोमोटिव में दिए गए कन्वर्टर की मदद से ओवर हेड इक्विपमेंट से बिजली खींचकर ट्रेन के कोचों तक पहुंचाती है। इससे पॉवर कार में खर्च होने वाले हाई स्पीड डीजल की बचत होने के साथ ही कार्बन उत्सर्जन और ध्वनि प्रदूषण कम हुआ है और रेलवे को राजस्व की बचत हो रही।