डाकघर की करीब एक सौ तीस साल पुरानी मनीआर्डर सेवा एक अप्रैल से बंद हो रही है। अब ई-मनीआर्डर और आई मनीआर्डर के जरिए लोगों तक धन तो पहुंचेगा लेकिन धन के साथ भेजा जाने वाला संदेश लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा। बाहर नौकरी कर रहे लोग जो पैसा अपने परिवार को भेजेंगे वह पहले की अपेक्षा जल्दी मिलेगा लेकिन संदेश नहीं पा सकेंगे।
डाकघर ने टेलीग्राम सेवा बंद करने के बाद अब मैनुअल मनीआर्डर सेवा भी बंद कर रहा है। मनीआर्डर सेवा डाकघर ने वर्ष 1885 में शुरू की थी। इसमें मनीआर्डर भेजने वाले को एक फार्म भरना होता था। इस फार्म में संदेश के लिए भी जगह रहती थी। यह फार्म डाकघर गंतव्य तक भेजता था। वहां फार्म में उल्लिखित धनराशि पोस्टमैन संबंधित को उपलब्ध करा देता था। धन के साथ भेजने वाले का संदेश भी उसे मिल जाता था। इस मनीआर्डर का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता था।
बाद में डाकघर ने ई-मनीआर्डर और आई-मनीआर्डर सेवा शुरू की। इससे धन तो लोगों के पास जल्दी पहुंचने लगा लेकिन संदेश भेजने की सुविधा इसमें नहीं है। ई-मनीआर्डर और आई-मनीआर्डर के साथ अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में मैनुअल मनीआर्डर सेवा भी चल रही थी लेकिन एक अप्रैल से डाकघर यह मैनुअल मनीआर्डर स्थाई रूप से बंद कर रही है।
कभी डाकिया का होता था इंतजार
एक समय था जब डाकिया का सबसे ज्यादा इंतजार रहता था। अपनों का संदेश पाने की चाह के बाहर नौकरी कर रहे लोगों के पास से आने वाला पैसे की आस में घरवाले डाकिया के लिए पलकें बिछाए रहते थे। संचार साधनों के विकास के साथ डाकिया की उपयोगिता भी कम हो गई है।
प्रधान डाकघर.........01
उपडाकघर.............31
शाखा डाकघर.......355
सौ साल से भी अधिक पुरानी मैनुअल मनीआर्डर सेवा बंद की जा रही है। ई-मनीआर्डर और आई-मनीआर्डर के लिए प्रधान डाकघर और सभी उपडाकघरों को कंप्यूटरीकृत किया जा चुका है। शाखा डाकघरों को जल्दी ही कंप्यूटरीकृत कराने की व्यवस्था की जा रही है। जब तक शाखा डाकघर कंप्यूटरीकृत नहीं होते हैं हैंड डिवाइस उपलब्ध कराई जाएंगी।
एसएन दुबे, डाक अधीक्षक, खीरी मंडल