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गरीबों के घर नहीं खिला ‘इंद्रधुनष’

Sat, 14 May 2016 09:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो-लखीमपुर खीरी।
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टीकाकरण्‍ा - फोटो : अमर उजाला
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ईंट पथेरों और घुमंतू परिवारों में नहीं हो पाया टीकाकरण
सभी को टीके नहीं लग पाए, एक दिन पहले ही हो गया अभियान पूरा
पहले चरण के टीकाकरण में वंचित थे 23 हजार बच्चे, 700 गर्भवती
टीकाकरण के पहले चरण के अभियान में टीका लगने से वंचित रह गए लोगों के लिए चलाए गए दूसरे चरण में गरीबों के घर पर सेहत का ‘इंद्रधनुष’ नहीं खिला। भारत सरकार ने भले ही टीकाकरण को मिशन इंद्रधनुष का नाम दिया हो लेकिन जिले में ईंट पथेरों, घुमंतू जनजातियों और कई मलिन बस्तियों में टीकाकरण के लिए सेहत महकमे की टीमें ही नहीं पहुंची। महकमे के लोग सेकेंड सैटरडे की छुट्टी मनाने में लगे रहे है और 14 मई को खत्म होने वाले अभियान को 13 मई को पूरा दिखा दिया। हालांकि रिपोर्ट 14 मई तक भी तैयार नहीं हो सकी है। 
यूं तो मिशन इंद्रधनुष में सभी वर्ग के लोगों को संपूर्ण टीकाकरण में शामिल करना था लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने ईंट भट्टों पर काम कर रहे मजदूरों के परिवारों, सड़कों पर झोपड़ी डालकर रहे घुमंतू जनजातियों के परिवारों और कई मलिन बस्तियों में गरीब परिवारों को छोड़ दिया। जबकि टीकाकरण की सबसे अधिक जरूरत इसी वर्ग को है। इस बाबत सीएमओ डॉ अरुण कुमार का कहना है कि अभियान में रविवार को भी किसी ने अवकाश नहीं लिया इसलिए 13 मई को सात दिन पूरा होने पर टीकाकरण का कार्य पूर्ण कर लिया गया। चूंकि बड़ा जिला है और सैकड़ों टीम लगी हैं, इसलिए रिपोर्ट अभी कंपाइल नहीं हो सकी है। एसीएमओ और अभियान के नोडल अफसर डॉ. बलवीर सिंह का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट में 23 हजार से अधिक बच्चे और सात सौ से अधिक गर्भवती टीकाकरण से वंचित थीं। डा. सिंह ने अनुमान जताया है कि जिले में करीब 25 हजार से अधिक टीके लगाए गए हैं। सभी को टीकाकरण से आच्छादित किया गया है।
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केस-1
सीएचसी के पास, पर भी वंचित
बांकेगंज। सीएचसी से चंद कदमों से दूर बांकेगंज-गोला रोड पर स्थित ईंट भट्टे पर लगभग दो दर्जन से अधिक परिवार की महिलाएं क्रमश: पिंकी, फूलमती, ज्ञाना देवी, मलीमुन निशां, आसमां, हसीन बानो आदि को मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम की कोई जानकारी ही नहीं है। इनके बच्चों का टीकाकरण भी नहीं हुआ।

केस-2
टीका! ये क्या है साहेब
धौरहरा। प्राथमिक विद्यालय कफारा के पीछे पॉलिथीन की झोपड़ियां बनाकर रहने वाले बहराइच के रायबोझा से आए घुमंतू परिवार के मुखिया चेतराम, सुनीता, इन्द्रेश्वर ने उल्टे पूछ लिया कि टीकाकरण क्या होता है? यहां भी कोई टीम नहीं पहुंची।

केस-3
निघासन। गांव हीरालालपुरवा निवासी तीन वर्षीय अरुण का पुत्र राहुल, चार वर्षीय परशुराम, तीन वर्षीय शालिनी पुत्री मालिकराम, भजनपुरवा निवासी ढाई वर्षीय अनिकेत पुत्र राजेश, तीन वर्षीय अनिकेत पुत्र अवधेश, मंझिलीपुरवा निवासी पांच वर्षीय हरिओम पुत्र प्रभू आदि को भी टीके नहीं लगे। यहां भी टीम नहीं आई।

केस-4
निघासन। आराधना ईंट उद्योग शीतलापुर में काम करने वाली धौरहरा निवासी गर्भवती राबिया ने बताया कि यहां कोई टीका लगाने नहीं आया। छेदुई पतिया में पीएचसी होने के बाद भी वहां टीकाकरण नहीं हुआ। इसी गांव की लल्ली बानो के टीका नहीं लग सका, जबकि वे कई बार अस्पताल गए।

यह था अभियान
मिशन इंद्रधनुष के जिले भर की सीएचसी, पीएचसी, एएनएम उपकेंद्रों और आंगनबाड़ी केन्द्रों पर हर सप्ताह बच्चों और गर्भवती का टीकाकरण किया जाता है। फिर भी जागरूकता के अभाव में तमाम लोग टीकाकरण से वंचित रह जाते हैं। ऐसे लोगों के टीकाकरण के लिए भारत सरकार ने सात से 14 मई तक यह अभियान चलाया। 
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मिशन इंद्रधनुष में 325 टीमें टीकाकरण में लगीं। इनमें एएनएम, आशा बहुएं, आंगनबाड़ी वर्कर के अलावा यूनीसेफ, डब्ल्यूएचओ और विभाग के अधिकारी नामित किए गए थे। शत प्रतिशत टीकाकरण तो नहीं हो सकता लेकिन जो लोग रह गए हैं, उनको रूटीन टीकाकरण के दौरान टीके लगाए जाएंगे।
डॉ अरुण कुमार, सीएमओ
 
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