धौरहरा के कफारा गांव स्थित मां आशापूर्णा मंदिर से वर्ष 1995 में चोरी हुई अष्टधातु की मूर्ति कचहरी स्थिति सदर मालखाने में रखवाया गया था। चोरी के इस मुकदमे में पिछले एक साल में पांच से छह बार कोर्ट में मूर्ति को प्रस्तुत किए जाने के आदेश हुए, पर मूर्ति कहां है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
अष्टधातु की ये मूर्ति राजा जोत सिंह द्वारा 185 साल पहले स्थापित की गई थी, जो वर्ष 1995 में चोरी हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने कुछ ही महीनों बाद चोरों को जेल भेजते हुए मूर्ति बरामद की थी। पुलिस ने मूर्ति को लखीमपुर कोर्ट के मालखाने में रखवाया था। इस मूर्ति को पेश करने के लिए कई बार कोर्ट ने आदेश दिए, लेकिन आज तक पुलिस मूर्ति पेश नहीं कर पाई है। लिहाजा मालखाने से मूर्ति गायब होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं सदर कोतवाली के मालखाने से भी जेवर से भरी पोटली गायब है।
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धौरहरा का कफारा गांव ईसानगर स्टेट के जांगड़ा वंश की रियासत में आता था। जांगड़ा वंश के राजा जोत सिंह ने वर्ष 1840 में कफारा गांव में लाल पत्थर से रानी महल मंदिर बनवाया था। इस मंदिर में महिषासुर मर्दनी काली स्वरूप मां आशापूर्णा की अष्टधातु से बनी मूर्ति की स्थापना कराई थी। मूर्ति का वजन करीब 95 किलो था। बुजुर्गों के अनुसार, यह मूर्ति काली कामिक्षा कोलकाता की मूर्ति के सांचे में ढाली गई थी।
रानी महल में स्थापित मां आशापूर्णा के भक्तों की अपार श्रद्धा आज भी बनी है। साल 1995 के माह अक्तूबर में यह बेशकीमती मूर्ति चोरी हो गई थी। पुलिस के मुताबिक कुछ ही महीनों में चोरी की गई मूर्ति बरामद करते हुए चोरों को जेल भेज दिया गया था। इसके बाद मामला कोर्ट में पहुंचा, जहां कई साल बीत जाने के बाद आज तक मूर्ति मंदिर को वापस नहीं मिल सकी है।
मामले की पैरवी कर रहे घटना के मुख्य गवाह और मंदिर की देखरेख करने वाले सत्य प्रकाश तिवारी की मौत हो गई तो उनके पुत्र सुमित तिवारी ने कमान संभाली। अधिवक्ता सुमित तिवारी ने बताया कि 1995 में जब मूर्ति चोरी हुई, उस समय इसकी कीमत करीब पांच करोड़ रुपये बताई गई थी। लोवर कोर्ट में मामला विचाराधीन है। कई बार कोर्ट ने पुलिस से मूर्ति पेश करने की बात कही, लेकिन मूर्ति पेश नहीं हो सकी।
अधिवक्ता सुमित का कहना है कि बार-बार आदेश होने के बाद मूर्ति पेश न करने से कहीं न कहीं मूर्ति गायब हो जाने की आंशका प्रबल है। वहीं धौरहरा कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार मिश्रा बताते हैं कि किसी ने अभी तक मूर्ति रिलीज कराने के लिए अदालत में दावा ही नहीं किया। यदि पक्षकार अदालत में दावा करें तो मूर्ति रिलीज हो सकती है।
कोतवाली के मालखाने से गायब हो गई जेवरों से भरी पोटली
मोहल्ला कपूरथला निवासी मुदित कुमार अग्रवाल ने बताया कि उनकी पत्नी आभा अग्रवाल की मौत 2007 में हुई थी। घटना में मायके पक्ष के लोगों ने दहेज एक्ट का मुकदमा दर्ज कराया था। पोस्टमॉर्टम के दौरान पत्नी के शरीर से मिले कीमती जेवरात को डाॅक्टरों ने सील करते हुए पुलिस को दिया था। मामला निस्तारित किया जा चुका है।
मुदित ने बताया कि साल 2024 में मृतका आभा के शरीर से उतरवाई गई सोने की कील, लाॅकेट सहित सोने की चेन, एक अंगूठी, 10 सोने की चूडियां वापस दिलाने की मांग की, लेकिन कोतवाली पुलिस ने कोर्ट को आख्या देते हुए यह बताया कि 27 सिंतबर 2013 में दर्ज तस्करा के मुताबिक बारिश में पोस्टमॉर्टम पोटली भीगने के कारण छत पर सुखाने के लिए रखी गई थी, जहां पर बंदरों ने उसे खुर्द-बुर्द कर दिया। हालांकि इस आख्या पर कोर्ट से कोतवाली पुलिस को लताड़ भी लग चुकी है। फिलहाल मामले में अगली सुनवाई 10 मार्च लगी है।
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सदर कोतवाली से पोटली गायब होने का मामला संज्ञान में है। जांच चल रही है। धौरहरा का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अपने स्तर से दिखवाता हूं। जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
संकल्प शर्मा, एसपी