लखीमपुर खीरी। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक धड़ल्ले से आरओ प्लांट संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन इनका पंजीकरण नहीं है। नगर पालिका, जल निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। सभी का कहना है कि उनके यहां पंजीकरण नहीं किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि उपभोक्ताओं को दिए जाने वाले पानी की जिम्मेदारी कौन लेगा।
शहर में एक दर्जन के करीब आरओ प्लांट संचालित हैं, जिनके पास लाइसेंस नहीं है। लगातार धरती से पानी खींचकर यह वाटर लेवल भी गिरा रहे हैं। गर्मी में पानी की मांग खूब बढ़ती है। लोग आरओ के जार वाला पानी मंगाकर पीते हैं। अमर उजाला की पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि आरओ प्लांट संचालक साधारण पानी सप्लाई के बदले आरओ पानी के दाम वसूल रहे हैं। शहर के राजापुर चौराहे, सैधरी, सुआगाड़ा, गढ़ी रोड, अर्जुनपुरवा समेत तमाम मोहल्लों में यह प्लांट धड़ल्ले से संचालित किए जा रहे हैं।
खेल यह भी...
खेल यहीं तक सीमित नहीं है। यदि मांग ज्यादा रहती है तो पिकअप गाड़ी में कर्मचारी 500 से एक हजार लीटर की टंकी रख लेते हैं और जहां जार में पानी खत्म होने लगता है तो मांग के अनुसार टंकी से ही जार को भरकर वाटर सप्लाई करते हैं।
किसी के पास नहीं कोई आंकड़ा
कोई भी व्यापार शुरू करने से पहले रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है लेकिन शहर सहित जिले में संचालित हो रहे आरओ प्लांट न तो संबंधित नगर पालिका के पास पंजीकृत हैं और न ही खाद्य एवं औषधि विभाग के पास।
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आरओ प्लांट संचालक नगर पालिका परिषद में रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं। यह कार्य जल निगम के पास है। वहीं रजिस्ट्रेशन होता है। इसके लिए जल निगम की एक संस्था भी है, जो काम करती है।
संजय कुमार, ईओ नगर पालिका लखीमपुर
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शहर के अलावा जहां-जहां भी आरओ प्लांट लगे हैं, वहां की जिम्मेदारी संबंधित नगर पालिका और नगर पंचायत के अधिकारियों की है। अधिकारी प्लांटों का रजिस्ट्रेशन करते हैं और पानी की जांच करते हैं।
योगेंद्र नीरज, एक्सईएन जल निगम ग्रामीण
शहर में कहीं से भी पानी के सैंपल लेकर उसके गुणवत्ता की जांच विभाग कराता है। आरओ प्लांट के रजिस्ट्रेशन का अधिकार विभाग के पास नहीं है। समय समय पर दुकानों, रेस्टोरेंट और होटलों पर बिकने वाली बोतल और पाउच के सैंपल लिए जाते हैं।
कौशलेंद्र, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा