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Lakhimpur Kheri News: जनरेटर न वेंटीलेटर, दम तोड़ रहा ट्रॉमा सेंटर

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ओयल ​कस्बे में बना ट्रामा सेंटर। संवाद
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लखीमपुर/ओयल। गंभीर मरीजों को जिले में इलाज मुहैया हो सके, इसको लेकर करीब चार वर्ष पहले ओयल कस्बे में ट्राॅमा सेंटर बनवाया गया था। हालांकि ट्राॅमा सेंटर के नाम पर बस बोर्ड लगाकर कुछ चिकित्सकों को तैनात कर दिया गया। यहां न तो पूरा स्टाफ है और न ही जांच के लिए जरूरी मशीनें हैं। इससे यहां आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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करीब दो करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2018 में ओयल में 20 बेड का ट्राॅमा सेंटर बनकर तैयार हुआ था। करीब तीन साल तक स्टाफ व संसाधन के अभाव में यह बंद रहा। काफी दिक्कतों के बाद ट्रॉमा सेंटर को 19 फरवरी 2021 में मरीजों के लिए चालू कराया गया था, लेकिन चिकित्सकों, स्टाफ, जांच व व्यवस्थाओं की कमी के कारण इसकी हालत आज भी दयनीय है।

बिजली जाते ही अंधेरे में डूब जाता है ट्रॉमा सेंटर
ट्रॉमा सेंटर में न तो जनरेटर की सुविधा है और न ही बिजली के लिए अलग से कोई लाइन। कस्बे में आई विद्युत लाइन से ही अस्पताल को लाइट दी जाती है। लाइट जाते ही मरीजों को यहां दिक्कत झेलनी पड़ती है। सबसे बुरा हाल शाम के बाद होता है। रात में बिजली जाते ही ट्रॉमा सेंटर अंधेरे में डूब जाता है।
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मरीजों का आंकड़ा
प्रतिदिन ओपीडी 40-45
एक माह की ओपीडी 1200
ऑपरेशन 32
रेफर मरीज प्रतिदिन 02

मौजूदा समय में है इतना स्टाफ
आर्थों सर्जन 4
एनेस्थेटिस्ट 1
मेडिकल ऑफिसर 2
स्टाफ नर्स 8
ओटी टेक्नीशियन 2
अन्य कार्य के लिए 9

इतने स्टाफ की है कमी
पद रिक्त
जनरल सर्जन 2
मेडिकल ऑफिसर 2
रेडियोलॉजिस्ट 2
कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर 4
स्टाफ नर्स 17
नर्सिंग अटेंडेंट 13

जांच के लिए जिला अस्पताल के लगाने पड़ रहे चक्कर
गंभीर मरीजों के लिए यहां वेंटिलेटर की भी सुविधा नहीं है। जांच के लिए यहां कुछ मशीनें तो लगाई गईं हैं, लेकिन वह अब काम नहीं कर रही हैं। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, कंप्यूटेड रेडियोग्राफी (सीआर) सहित कई अन्य महत्वपूर्ण जांचें यहां नहीं हो पा रहीं हैं। यहां सिर्फ एचआइवी, मलेरिया, टायफाइड सहित किट से होने वाली सामान्य जांचें ही हो पाती हैं। जांच न होने से मरीजों को जिला अस्पताल या प्राइवेट लैब का सहारा लेना पड़ता है।

फोटो 30
जिला अस्पताल में कराया एक्सरे

करीब 15 दिन पहले एक हादसे में हाथ में फैक्चर हो गया था। चार दिन पहले ट्रॉमा सेंटर में ऑपरेशन हुआ है। हालांकि एक्सरे जांच कराने के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ता है। - ऋषभ शुक्ला, मरीज, मैनभीरी

फोटो 31
इलाज यहां, जिला अस्पताल में होती है जांच

यूरिन को लेकर समस्या है। करीब 15 दिन से ट्रॉमा सेंटर आ रहे हैं। यहां चिकित्सक देख तो लेते हैं, लेकिन जांच के लिए जिला अस्पताल या बाहर की लैब में जांच करना पड़ता है। - रामपाल, मरीज, चिकनाजती

ट्रॉमा सेंटर में पिछले तीन महीने में काफी सुविधाएं बढ़ी हैं। कई बड़ी-बड़ी सर्जरी भी हुईं हैं। मेडिकल स्टाफ भी पर्याप्त है। पहले की अपेक्षा अस्पताल काफी बेहतर हुआ है और भी प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. संतोष गुप्ता, सीएमओ

विश्व ट्रॉमा दिवस आज
विश्व ट्रॉमा दिवस हर साल 17 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस दिन की स्थापना ट्रॉमा एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा 2011 में की गई थी, जिसका उद्देश्य ट्रॉमा (गंभीर चोटों) और उनके प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और समय पर चिकित्सा देखभाल के महत्व पर जोर देना है।

ओयल कस्बे में बना ट्रामा सेंटर। संवाद

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