लखीमपुर खीरी। देवकली के सैदापुर भाऊ स्थित मेडिकल कॉलेज में कैडवर (शव) की कमी है। चिकित्सा शिक्षा में कैडवर का उपयोग शरीर रचना (एनाटॉमी) और शल्य तकनीक सीखने के लिए किया जाता है। कैडवर की कमी को लेकर मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता ने लोगों से देहदान को लेकर अपील की है।
प्राचार्य ने बताया कि देहदान मानवता की सेवा में एक अनमोल योगदान देने का अवसर है। देहदान न केवल चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को सशक्त बनाता है, बल्कि यह समाज के लिए एक अमूल्य उपहार है। कैडवर देने से भावी चिकित्सा को प्रशिक्षित करने और जीवन रक्षक शोध में सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि देहदान का संकल्प और पंजीकरण कराके लाखों जीवन को बचा सकते हैं।
यह कर सकते हैं देहदान
- ब्रेन डेड व्यक्ति का दिल मशीनों की मदद से धड़कता रहता है, जिससे अंगों में रक्त संचार बना रहता है।
- कार्डियक डेड डोनर।
- प्राकृतिक रूप से हुई मौत।
- कोई भी वयस्क।