नेपाल में हर साल आने वाली बाढ़ से भी नेपाल के जंगली हाथी पलायन को मजबूर होते हैं। दरअसल, नेपाल की नदियों में हर साल आने वाली बाढ़ के चलते बारिश के मौसम में जंगल के अंदर पानी भर जाता है। जिससे जंगली हाथियों के लिए आवास का संकट पैदा हो जाता है।
नेपाल से हाथियों के आने के हैं कई कॉरिडोर
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर बी. प्रभाकर बताते हैं कि हाथियों में जेनेटिक मेमोरी होती है। इसके कारण हाथी उन्हीं रास्तों से आवागमन करते हैं और वहीं जाते हैं, जिन रास्तों से और जहां उनके पुरखे आते-जाते रहे हैं। तराई के जंगल में हाथियों के आने के कई कॉरिडोर हैं।
इनमें से एक कॉरिडोर नेपाल के शुक्लाफांटा से घनाराघाट, टाटरगंज, ट्रांस शारदा क्षेत्र होते हुए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के हरीपुर रेंज तक है। जंगली हाथी यहां से किशनपुर सेंक्चुरी की ओर रुख करते हैं। इनके अलावा हाथियों के और भी कई कॉरिडोर हैं, जिनका इस्तेमाल हाथी दुधवा के सठियाना रेंज, कतर्निया घाट और महराजगंज के सोहागी बरुआ आने में करते हैं।
हाथी किसानों के लिए बनते हैं मुसीबत
नेपाल से आने वाले जंगली हाथी तराई में आकर दिन भर तो जंगल में आराम करते हैँ और रात में सैर करने के लिए खेतों की ओर निकल जाते हैं। खेतों में पहुंचकर जंगली हाथी फसलों को रौंद कर तबाह कर डालते हैं। पिछले साल अगस्त में आए हाथियों के दो झुंडों ने जंगल के आसपास काफी उत्पात मचाया था। लाखों रुपये मूल्य की फसलों को नष्ट कर दिया था। आज तक इन किसानों को मुआवजा भी नहीं मिल पाया है।