- पूर्व की घटना पर एसएसबी ने नहीं लिया था सबक
- वनबीरपुर में हुए धमाके के बाद सक्रिय हुई एसएसबी
ढाई साल पहले बरसोला कलां में हुए विस्फोट को यदि एसएसबी ने गंभीरता से लिया होता तो नेपाल से आने वाले स्क्रेप पर पैनी नजर रखती तो शायद वनबीरपुर में विस्फोट की घटना दोबारा नहीं होती। इस घटना के बाद गंभीर हुई एसएसबी ने नेपाल से स्क्रेप लाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा आने-जाने वालों पर कड़ी नजर रखकर चेकिंग शुरू कर दी है।
वनबीरपुर में दो दिन पहले स्क्रेप तोड़ने के दौरान शक्तिशाली विस्फोट हुआ था। जिससे उसे तोड़ रहे गृहस्वामी उत्तम के चिथड़े उड़ गए थे। एक महिला और पांच बच्चे घायल हो गए थे। नेपाल से लाए गए स्क्रेप से सीमा पर हुई घटना को लेकर एसएसबी का रवैया काफी शर्मनाक रहा। सिविल पुलिस का मामला बताकर एसएसबी अपनी जिम्मेदारी को भूल गई। यहां तक उसने अपनी फारेसिंक टीमों को मौके पर भेजकर यह भी जानने की कोशिश नहीं कि विस्फोट किस चीज से हुआ। एसएसबी चौकी बरसोला कलां के इंस्पेक्टर नारायण शर्मा ने बताया कि नेपाल से स्क्रेप लाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। सभी नाकों और रास्तों पर सघन चेकिंग की जा रही है। चेकिंग व्यवस्था को और अधिक कड़ा किया गया है।
बसपा नेता ने ली बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी
तिकुनियां कोतवाली के गांव वनबीरपुर में स्क्रेप में हुए धमाके में मारे गए गांव निवासी उत्तम के सभी बच्चों की शिक्षा पर पांच सालों तक आने वाले खर्च की जिम्मेदारी बसपा नेता जीएस सिंह ने ली है। उन्होंने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार का हाल जाना और उन्हें ढांढस बंधाया है। उन्होंने कहा कि उत्तम मेहनत मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण पोषण कर रहा था। उसकी मौत से परिवार की जीविका का सहारा चला गया। उन्होंने उसके बच्चों सुमित, रचना और कोमल की पांच साल तक की पढ़ाई का पूरी जिम्मेदारी ली है।