गन्ना विभाग ने 3.50 लाख बोतल नैनो यूरिया की डिमांड भेजी
लखीमपुर खीरी। रासायनिक खाद के तौर पर सबसे अधिक दानेदार यूरिया का प्रयोग फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए किया जाता है, लेकिन खेत में दानेदार यूरिया का 28 से 30 प्रतिशत उपभोग होता है। शेष बची यूरिया नाइट्रोजन गैस या नाइट्रेट के रूप में जमीन में लीच (निक्षालन) करके, उड़कर व पानी के साथ बह जाता है, जो कि मिट्टी, वायु व जल को प्रदूषित करता है। वहीं नैनो यूरिया फसल में 70 से 80 प्रतिशत तक पौधों द्वारा उपयोग कर लिया जाता है, जिससे पर्यावरण शुद्घ रहता है। इसलिए गन्ना विभाग ने दानेदार यूरिया के प्रयोग को कम करके नैनो यूरिया का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करने का अभियान तेज कर दिया है।
जिला गन्ना अधिकारी (डीएसओ) ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि नैनो यूरिया का प्रयोग किसानों के लिए कम लागत में अधिक लाभदायक सिद्घ होगा। फसलों में नाइट्रोजन उपभोग की क्षमता बढ़ने से उपज व गुणवत्ता में सुधार होने के साथ ही किसानों की आमदनी में वृद्घि होगी। उन्होंने बताया कि गन्ना आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने इस वर्ष नैनो यूरिया का प्रयोग करने पर जोर दिया है। नैनो यूरिया जनपद की समस्त गन्ना समितियों पर उपलब्ध कराई गई है।
जनपद में 3.50 लाख बोतल नैनो यूरिया वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की बोतल को 125 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ क्षेत्रफल में प्रयोग किया जा सकता है। नैनो यूरिया का भंडारण एवं परिवहन सुविधाजनक एवं कम खर्चीला है। इसका प्रयोग सुबह या शाम के समय करें, जब तेज हवा, धूप या ओस न हो। नैनो यूरिया का उपयोग अनाज, गन्ना, सब्जी आदि फसलों पर दो बार और दलहनी फसलों पर एक बार किया जा सकता है।
दानेदार यूरिया से नैनो का रेट कम, रिजल्ट ज्यादा
45 किलोग्राम भर्ती वाली दानेदार यूरिया की कीमत 266.50 रुपये प्रति बोरी है, जिससे 28 से 30 प्रतिशत तक पौधे उपभोग कर पाते हैं। वहीं नैनो यूरिया 500 मिलीलीटर बोतल की कीमत 240 रुपये है और तरल रूप में होने के कारण इसके छिड़काव से पौधे 70 से 80 प्रतिशत तक यूरिया का उपभोग कर लेते हैं। इससे नैनो यूरिया का प्रयोग कम लागत में अधिक लाभ देने में सक्षम है।
परिवहन लागत में 53.55 लाख की होगी बचत
जनपद में गन्ना विभाग द्वारा प्रति वर्ष 15261 मीट्रिक टन दानेदार यूरिया की आपूर्ति की जाती है। जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि इस पर परिवहन (भाड़ा) लागत करीब 64.51 लाख आती है। इसके सापेक्ष यदि नैनो यूरिया का उपयोग किया जाता है, तो परिवहन लागत करीब 10.96 लाख आएगी। इससे परिवहन लागत में दानेदार यूरिया के सापेक्ष नैनो यूरिया के उपयोग में 83.10 प्रतिशत यानी 53.55 लाख की बचत होगी, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। क्योंकि यह परिवहन लागत भी किसान के जेब से ही जाती है। वहीं समिति से दानेदार यूरिया को घर या खेत तक ले जाने में किसानों को बड़े वाहन की जरूरत पड़ती है, लेकिन नैनो यूरिया की बोतल हाथ या झोले में रखकर आसानी से खेत तक पहुंचाई जा सकती है।