तराई के हजारों गन्ना किसान इस होली पर भी तंगहाल रहेंगे। इस समय जहां हर घर में होली की खुशियां मनाने की तैयारियां चल रहीं हैं, वहीं अनेक गन्ना किसान होली का त्योहार मनाने के लिए उधारी मांगते घूम रहे हैं।
तराई के चीनी मिल मालिक किसानों को नगद भुगतान के बदले चीनी देकर उनके जख्म पर मरहम लगाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। किसान चीनी लेने के लिए तैयार नहीं हैं। क्षेत्रीय गन्ना उत्पादक किसानों का मानना है कि पैसे का काम तो पैसे से ही चलेगा, चीनी से नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले सालों की तरह इस साल भी उनकी हाड़-तोड़ मेहनत की बाद उगाई गई गन्ने फसल का भुगतान मिलें रो-रो कर कर रहीं है। इसके चलते वे होली मनाने के लिए उधार मांगते घूम रहे हैं। कोई रिश्तेदार से पैसे ले रहा है तो कोई साहूकार से कर्ज मांग रहा है। किसानों की जेब खाली होने से हालात यह हैं कि होली की खुशियाें के लिए पकवान की बात तो जाने दीजिए बच्चों और महिलाओं के नए कपड़े तक नहीं बन पा रहे हैं।
चीनी मिलें किसानों का करोड़ों रुपया दबाए बैठीं हैं। क्षेत्रीय किसानों प्रेम बिहारी लाल, विपिन शर्मा, अंजू सिंह, प्रेम सिंह, वीर्रेंद्र पाल सिंह, धर्मेंद्र मौर्य, संजय भार्गव, केके मिश्र आदि ने होली की खुशियां मनाने के लिए चीनी मिल मालिकों से इस साल 15 फरवरी तक बिक्री किए गए गन्ना मूल्य का भुगतान देने की मांग की है।