नगर के साहित्यकार पंडित सियाराम मिश्र की पांच जनवरी को
पुण्यतिथि है। उनके निधन के बाद नगर पालिका परिषद बोर्ड के प्रस्ताव पर
परिवार वालों ने उनकी प्रतिमा तो बनवा ली लेकिन वह आज तक स्थापित नहीं हो
पाई है।
साहित्य महोपाध्याय कवि सियाराम मिश्र की स्मृति को जीवंत रखने
के लिए प्रबुद्ध नागरिकों, साहित्यकार, पत्रकार, नगर पालिका सदस्य पद्मजा
रस्तोगी ने उनकी प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव तीन दिसंबर 2010 को नगर
पालिका परिषद बोर्ड ने पारित किया था।
साथ ही 26 जनवरी 2011 प्रतिमा
स्थापित करने की तिथि तय की थी। इसके लिए कवि के परिवार वालों ने प्रतिमा
भी बनवा ली थी। लेकिन बोर्ड में प्रस्ताव पारित होने के बाद अनुमोदन के लिए
शासन को नहीं भेजा गया जिसकी वजह से अनुमति नहीं मिली।
आरटीआई से खुला पालिका की उदासीनता
नागरिक
रमेशचंद अग्निहोत्री द्वारा जन सूचना अधिकार अधिनियम में मांगी गई सूचना
से पता चला है कि प्रतिमा स्थापना में भी उदासीनता हुई। तत्कालीन ईओ/एसडीएम
अशोक कुमार ने अपने लिखे पत्र में कहा कि 20जनवरी 2011 से पूर्व उन्हें
कोई लिखित या मौखिक निर्देश नगर पालिका परिषद अध्यक्ष द्वारा नहीं दिए गए
थे। 19 जनवरी को डीएम को प्रतिमा स्थापना के विषय में पत्र दिया गया। इस
पत्र के पहले या बाद में अध्यक्ष या ईओ द्वारा कोई पत्र डीएम या शासन को
नहीं दिया गया। इस कारण 26 जनवरी 2011 प्रतिमा स्थापना तिथि तक और बाद में
भी शासन से कोई अनुमति नहीं मिली।
देशभर में पहचान बनीं उनकी रचनाएं
गोला
गोकर्णनाथ। पंडित जी की कृति महासभा, बेर भीलनी के, गायन जस देखेन, धूप
करे हस्ताक्षर, पर उन्हें उप्र हिंदी साहित्य संस्थान ने चार बार और
साहित्य सम्मेलन प्रयाग ने दो बार सम्मानित किया। वह दूरदर्शन और आकाशवाणी
के सुपरिचित कवि भी रहे। उनकी रचना आंगन की नागफनी, पंचवटी से कर्बला, दहेज
बत्तीसी, स्टालिन ग्राद, हिरोशिमा, हजरत इमाम हुसेन, जटायु, भारत की
विभूतियां, भारत के सबूत, वेदना, अनामा, तुतलाय गुलाबन के कलिका प्रकाशित
हो चुकी है। महात्मा बुद्ध का एकांत, बिजुरी कौंध गई, महाकाव्य मां गीत
संग्रह भारत के वैज्ञानिक अभी अप्रकाशित हैं।