राम, लक्ष्मण, सीता के स्वागत को सजा समूचा शहर
शहर की 152 वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक रामलीला में भरत मिलाप के प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद राम और लक्ष्मण सीता के साथ पुष्पक विमान से वापस अयोध्या लौटते हैं। अयोध्या पहुंच कर राम सबसे पहले अपने अनुज भरत से भेट करते हैं।
भरत मिलाप की यह लीला शहर के पुरानी गल्ला मंडी में हुई। भरत मिलाप के बाद रामलीला मंच पर ही सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भरत मिलाप के लिए पुरानी गल्ला मंडी को अयोध्या नगरी का रूप दिया गया। पूरे परिसर को बिजली की रंग बिरंगी बिजली की झालरों से आकर्षक ढंग से सजाया गया।
राम, लक्ष्मण, भरत शत्रुघ्न, सीता और हनुमान की सवारी के पुरानी गल्ला मंडी पहुंचने पर स्थानीय व्यापारियों ने उनका भव्य स्वागत किया। पूजा अर्चना और आरती के बाद भरत मिलाप की लीला का मंचन किया गया। रावण वध और लंका विजय के बाद जब राम, लक्ष्मण और सीता के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या वापस आते हैं। राम राजभवन जाने से पहले उस स्थान पर जाते हैं जहां भरत एक वैरागी की तरह नगर से बाहर कुटी में वास कर रहे होते हैं। राम, लक्ष्मण और सीता को देखते ही भरत उनके चरणों में लोट जाते हैं। राम उन्हें उठा कर अपने गले लगा लेते हैं। दोनों की आंखों से अश्रुओं की धारा बहने लगती है। राम और भरत के इस मिलन को देख दर्शक भी भाव विभोर हो उठे। पूरा दृश्य इतना मार्मिक और दिल को छू लेने वाला था कि लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए।
संचालन सेठ गयाप्रसाद ट्रस्ट के विपुल सेठ, किशनजी सेठ और कैलाश नाथ सेठ ने किया। व्यवस्था में स्थानीय व्यापारियों का सहयोग रहा। भरत मिलाप रामलीला के प्रांरभ से ही शहर की पुरानी गल्ला मंडी में होता आया है।
मोहम्मदी। कस्बे में हो रही रामलीला में रामचंद्र जी द्वारा सुग्रीव से मित्रता और बालि के वध की लीलाओं का मंचन किया गया। भगवान सीता माता की खोज करते हुए किष्किंधा पर्वत पर पहुंचे, श्रीराम ने सुग्रीव के मिलने पर सीता की जानकारी पूछी, सुग्रीव ने पूरी कथा राम को बताई। उन्होंने बताया कि माता का हरण रावण ने किया।
सुग्रीव ने अपने भाई बालि के अत्याचार की कहानी रामचंद्र जी को बताई और उनसे मदद की गुहार लगाई। श्रीराम ने सुग्रीव की मदद करते हुए बालि का वध किया और सुग्रीव को राजगद्दी पर बैठाया। मंच का संचालन पं. चंद्रभाल मिश्र कर रहे हैं। चेयरपर्सन दुर्गा मेहरोत्रा, संदीप मेहरोत्रा उर्फ कन्हैया, शिवम राठौर, सुशील रस्तोगी, के एल कुशवाहा, स्पर्श मेहरोत्रा, रमाकांत द्विवेदी, मानस त्रिवेदी, शिवम मिश्रा सहित दर्शकों ने श्रीराम की आरती उतारी।
महेवागंज। कस्बा स्थित नवभारत पब्लिक स्कूल में बुराई के प्रतीक रावण का पुतला दहन किया गया। प्रबंधक एसएस कंबोज के मार्ग दर्शन में छात्रों ने प्रांगण में करीब 25 फुट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया। बच्चों की टोली ने रामलीला का मंचन भी किया। छात्रों ने ही भगवान राम और रावण की भूमिका निभाई। इस दौरान मेले में छात्रों ने दुकानें भी लगाईं। प्रधानाचार्य राम नरेश मिश्रा ने बच्चों को पुरस्कृत किया। छात्रावास प्रमुख अध्यक्ष जरनैल सिंह ने आभार व्यक्त किया।
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संडिलवा में रामलीला मेले का शुभारंभ
मितौली। सांडिलवा में दानव बाबा सेवा समिति के तत्वावधान में रामलीला मंचन और रावण दहन के मेले का शुभारंभ परंपरागत तरीके से बुजुर्गों की उपस्थिति में फीता काटकर किया गया। मेले के आयोजक दिलीप सिंह ने बताया कि इस बार मेले का विशेष आकर्षण रावण और मेघनाद के पुतले रहेंगे। संचालन अरविंद गिरि ने किया। गोपाल गिरि, राजकिशोर मिश्रा, गजराज भार्गव, सुखपाल सिंह, रमेश वर्मा, रामास्वामी, परशुराम दीक्षित, संगम सिंह, छोटे सिंह, जगदीश शुक्ल उपस्थित रहे।
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गोला में राम रावण संग्राम आज
गोला गोकर्णनाथ। नगर के मेला मैदान में हो रहे श्री रामलीला महोत्सव में श्रीराम और रावण के संग्राम की मेला कमेटी द्वारा पूरी तैयारी कर ली गई है। मेघनाद, कुंभकर्ण और रावण वध के बाद पुतला दहन 13 अक्तूबर की शाम को होगा।
वृंदावन के दाऊ दयाल आदर्श एकता मंडल के कलाकारों ने बालि वध, श्री हनुमान जी द्वारा सीता का पता लगाकर अक्षय कुमार का वध किया और रावण की लंका का दहन किया। श्री हनुमान के वापस लौटने पर भगवान श्री राम ने समुद्र के ऊपर लंका तक जाने के लिए सेतु का निर्माण किया और रामेश्वरम शिव की स्थापना कर पूजन किया। श्रीराम लीला का आकर्षक मंचन देखने के लिए काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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पलिया में धू धू कर जला रावण का पुतला
पलियाकलां। पलिया के रामलीला मैदान पर चल रही रामलीला के अंतिम दिन लंकेश्वर का वध किया गया। इससे पूर्व आतिशबाजी हुई जिसकी सभी ने सराहना की। रावण वध को देखने के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर्व यहां बुधवार को मनाया गया। यहां चल रही रामलीला में अंतिम दिन राम के स्वरूप ने रावण का अग्नि तीर से वध किया। इसके बाद रावण का पुतला जलाया गया। इससे पूर्व यहां आतिशबाजी का आयोजन किया गया। जिसकी सभी ने सराहना की। लंका दहन का भी बेहतरीन मंचन हुआ और इसकी भी खूब प्रशंसा हुई। रावण वध को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। यहां लगे मेले का भी लोगों ने जम कर आनंद लिया। सुरक्षा व्यवस्था के लिए एसओ बृजराज यादव, चौकी इंचार्ज जेके भदौरिया, एसआई राजेश सिंह समेत तमाम पुलिस बल भी मौजूद रहा। मेला कमेटी ने आए हुए लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।