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आरोपी के भाई को पुलिस ने हिरासत में लेकर छोड़ा

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सिंगाही। तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के आरोपी भाई को निर्दोष बताने थाना पहुंचे आरोपी के भाई को एसओ ने हिरासत में ले लिया। करीब तीन घंटे हिरासत में रखने के बाद उसे छोड़ दिया। एसओ ने आरोपों को निराधार बताया है। उधर, आरोपी के भाई ने कहा कि उच्च स्तरीय जांच करा लेनी चाहिए। जांच में दोषी पाए जाने पर भाई को फांसी की सजा दी जाए।
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गांव निवासी सतनाम ने बताया कि तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में बच्ची के परिवार वालों ने बड़े भाई लेखराम को नामजद किया था। आरोप है कि लेखराम बेगुनाही का सबूत देने के लिए थाने गया था। उसके बाद उसे मुठभेड़ में दिखाकर उसे जेल भेज दिया गया। उसने बताया कि छह साल पहले उसकी भाभी की हत्या बच्ची के ताऊ ने कर दी थी। उस मामले में उनको सजा होने वाली है। इसलिए उसके भाई को फंसाने की साजिश रची गई है। सतनाम ने बताया कि वह मामले की सफाई देने के लिए एसपी के यहां गया था। वहां से वापस आते समय सिंगाही एसओ प्रदीप सिंह ने उसे थाना में बैठा लिया। करीब तीन घंटे तक उससे पूछताछ की। उसके बाद उसे छोड़ दिया। उधर, एसओ प्रदीप सिंह ने बताया कि आरोपी के भाई को हिरासत में लेने का आरोप निराधार है। उन्होंने उसे हिरासत में नहीं लिया है।
मामले की जांच सीबीसीआईडी से कराने की मांग
बसपा राष्ट्रीय महासचिव आरएस कुशवाहा ने सिंगाही की घटना की घोर निंदा की। उन्होंने मुख्यमंत्री से पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये दिलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस घटना में जल्दबाजी करते हुए पुलिस मुठभेड़ दिखाकर दलित युवक का चालान भेजा है। भाजपा सरकार में दलितों का उत्पीड़न, महिलाओं के साथ अत्याचार से पूरा प्रदेश त्राहि-त्राहि कर रहा है। उन्होंने घटना की जांच सीबीसीआईडी से कराने की मांग की है।
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